जस्टिस वर्मा की सिफारिशों से कानून मंत्री सहमत नहीं

उनका कहना है कि उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने के बजाय महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के निपटारे के लिए ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए, ताकि 18 महिनों के अदंर इस मामलों का निपटारा हो सके। दरअसल चुनाव आयोग के मुताबिक वर्तमान कानून के मुताबिक उन्हीं उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है जिन्हें न्यूनतम दो साल की सजा हो चुकी हो। लेकिन वर्मा कमिटी ने उन सभी उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिशें की है जिनपर आरोप तय हो चुका है।
कानून मंत्री चाहते है कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ 5 साल की सजा हो सकने वाले आरोप लगे है, उन्हें अयोग्य घोषित करने के बजाए इस बात पर विचार करना चाहिए कि किन मामलों में उनके खिलाफ आरोप तय होकर उन्हें सजा हो सकती है। दरअसल कानून मंत्री अश्वनी कुमार वर्मा कमेटी के इन सिफारिशों से खुश नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जस्टिस वर्मा को पत्र लिखकर उनकी सिफारिशों के लिए उनका आभार जताया था। ऐसे में एक ही सरकार में मंत्री और मुखिया के बीच इस मुद्दे पर दो राय पैदा हो गया है।












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