राज ठाकरे की ओर उद्धव ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ
मुंबई। शिवसेना के पूर्व अध्यक्ष व संस्थापक बाल ठाकरे के परिवार का कहना है कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि राज और उद्धव एक हो जायें। अब शायद उनकी यह इच्छा जल्द ही पूरी होगी, क्योंकि शिवसेना की कमान संभालते के तुरंत बाद उद्धव ठाकरे के मन में चचेरे भाई राज ठाकरे के प्रति प्यार उमड़ पड़ा है। उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र में दिये गये साक्षात्कार में कहा कि उनके दरवाजे हमेशा राज के लिये खुले हुए हैं। उन्होंने कहा, "अगर राज चाहें तो हम दोनों मिलकर गठबंधन कर सकते हैं।"
उद्धव की इस मंशा से महाराष्ट्र में बाकी राजनीतिक दलों के कान खड़े हो गये हैं। क्योंकि सभी जानते हैं कि जिस दिन राज और उद्धव एक हो गये, उस दिन बाकी दलों के लिये मुसीबत खड़ी हो सकती है। खास तौर से कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के लिये। उद्धव ने अपने साक्षात्कार में कहा, "अगर राज ठाकरे शिवसेना के साथ आना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। शिवसेना के साथ दिल से आने वालों का स्वागत ही होगा।" उन्होंने यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें पूछा गया था कि क्या वो राज को अपने साथ शामिल करेंगे?

गौरतलब है कि आपसी टकराव की वजह से 2006 में राज ठाकरे शिवसेना से अलग हो गये थे। उसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया और उनकी पार्टी का एजेंडा भी लगभग वही है, जो शिवसेना का है। मराठी वोट। वैसे बाल ठाकरे की जब तबियत खराब हुई थी, तब राज पूरे समय मातोश्री में रहे थे। अंतिम संस्कार होने तक राज ठाकरे अपने परिवार के साथ रहे। हालांकि उस दौरान मीडिया में दोनों भाईयों के बीच अलगाव की खबरें भी आयीं।












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