मोदी जीते इसलिए गडकरी हारे
दिल्ली के सुभाष अग्रवाल ने ट्विटर पर लिखा है कि भाजपा को अगर दिल्ली की सत्ता हासिल करनी है और देश पर राज करना है तो उसे अपने कद्दावर नेता नरेन्द्र मोदी को आगे करके साल 2014 का चुनाव लड़ना होगा और सबको पता है कि गडकरी और मोदी में हमेशा से कोल्ड वार रहा है।
हालांकि दोनी ही आरएसएस के प्रिय है लेकिन संघ के लिए एक एकलव्य है और एक अर्जुन। जाहिर है इतिहास हमेशा से अर्जुन के पक्ष में रहा है इसलिए एकलव्य गडकरी का साथ संघ को छोड़ना पड़ा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मोदी के ही कारण गडकरी को कुर्सी छोड़नी पड़ी है।
जिस दिन से गडकरी आरोपों के चपेटे में आये हैं उसी दिन से वरिष्ठ नेता और मोदी के प्रिय राम जेठमलानी ने चिल्ला-चिल्ला कर गडकरी का इस्तीफा मांगा था लेकिन पार्टी ने उनकी एक नहीं सुनी, तब गुजरात चुनाव होने वाले थे। लेकिन अब चुनाव हो चुके है और परिणाम सामने हैं और गुजरात में मोदी की हैट्रिक हो गयी है जिसके चलते मोदी का पलड़ा हर तरह से भाजपा में भारी हो गया है।
उनके अलावा किसी भी नेता में इतना दम नहीं है वो जानाधार पा सके। सभी जानते हैं कि गुजरात में मोदी जीते हैं ना कि भाजपा। इसलिए भाजपा के कद्दवार नेताओं को लगने लगा कि मोदी को नाराज करना ठीक नहीं है इसलिए उन्होंने गडकरी को कुर्सी छोड़ने के लिए कहा ताकि आने वाले चुनाव में वो लोगों से कह सके कि हमने किसी भी भ्रष्टाचार में घिरे व्यक्ति का साथ नहीं दिया। येदुरप्पा से लेकर गडकरी तक सभी ने अपना पद छोड़ा।
मालूम हो कि मंगलवार देर शाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन गडकरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मंगलवार शाम को मुंबई में चले बीजेपी मंथन के बाद अचानक से गडकरी ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि वो विरोधों और आरोपों से तंग आकर पद छोड़ रहे हैं।













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