सिर्फ दो बच्‍चे पैदा करने की नीति की मांग पर पीआईएल

लखनऊ। इसमें कोई शक नहीं कि देश के विकास में सबसे बड़ा व्‍यवधान देश की जनसंख्‍या है और तमाम उपायों के बाद भी यह तेजी से बढ़ रही है। भारी-भरकम जनसंख्‍या ही है, जिस कारण देश के कई हिस्‍सों में भुखमरी से लोग मरते हैं। यही कारण है कि लोगों को नौकरी के लाले हैं। इसी जनसंख्‍या पर लगाम तभी लग सकेगी, जब एक परिवार में सिर्फ दो बच्‍चे हों। इसी नियम को लागू करवाने के लिये इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल की गई है। याचिका की सुनवाई सोमवार को चीफ जस्टिस शिव कीर्ति सिंह और जस्टिस डी के अरोरा की बेंच में होगी।

समाजसेविका नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक पीआईएल दाखिल करते हुए मांग की है कि देश की राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या नीति के अंतर्गत एक परिवार में सिर्फ 2 बच्‍चों वाली नीति को लागू कर देना चाहिये। इसे लागू करने के साथ-साथ इसका जोरशोर से प्रचार-प्रसार किया जाये और नियम को तोड़ने वालों के खिलाफ दंड निर्धारित किया जाये।

PIL for two child norm to control population

पीआईएल 446/2013 में कहा गया है कि भारत में जनसँख्या विस्फोट एक वास्तविक समस्या है। वर्तमान राष्ट्रीय जनसंख्या नीति अस्पष्ट है और वह जनसंख्या नियंत्रण करने के अपने उद्देश्य में पूर्णतया विफल रहा है। अतः अब दो-शिशु नियम स्वीकार करने की आवश्यकता हो गयी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी जावेद बनाम हरियाणा सरकार तथा जिले सिंह बनाम हरियाणा सरकार आदि में दिये अपने निर्णयों में उचित ठहराया है।

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