गडकरी का दोबारा भाजपा अध्‍यक्ष बनना तय, उठे पांच सवाल

Nitin Gadkari
नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी के पितामह यानी लाल कृष्‍ण आडवाणी की रज़ामंदी के बाद अब नितिन गडकरी का दोबारा पार्टी अध्‍यक्ष बनने का रास्‍ता साफ हो गया। अब जल्‍द ही गडकरी नामांकन दाखिल करेंगे और उन्‍हें चुनौती देने के लिये कोई भी नेता मैदान में नहीं होगा। इसी के साथ ही गडकरी के खिलाफ पांच बड़े सवाल उठे हैं।

पिछले दो दिन से सवाल उठ रहे थे कि क्‍या नितिन गडकरी दोबारा भाजपा के अध्‍यक्ष बनेंगे या नहीं। इस पर राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ ने अपनी राय पहले ही हां के रूप में दे दी थी। उसके बाद मामला फंसा था कि कुछ नेता सुषमा स्‍वराज को अध्‍यक्ष बनाना चाहते थे। इस पर पार्टी ने एक अनौपचारिक बैठक बुलाई, जिसमें यह फैसला हुआ कि सुषमा भी इस पद के लिये दावेदारी पेश नहीं करेंगी। अंत में सारा दारोमदार आडवाणी पर आकर थमा और उन्‍होंने भी हां कर दी।

गडकरी के लिये पांच सवाल

अब बात आती है कि आखिर गडकरी के खिलाफ कौन से सवाल हैं और किसने उठाये हैं और क्‍यों उठाये हैं। ये सवाल उठाये हैं उत्‍तर प्रदेश की सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने। वो भी इसलिये क्‍योंकि दोबारा अध्‍यक्ष बनने के बाद गडकरी के नेतृत्‍व में ही पार्टी लोकसभा चुनाव 2.14 के लिये वोट मांगने आयेगी।

समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने गडकरी को मेल व फैक्स के जरिये पत्र भेजकर कहा है कि राज्यसभा में संविधान संशोधन बिल पारित कर भाजपा ने भारी गलती की है, जिसे पार्टी सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करे और स्पष्ट घोषणा करें कि भाजपा लोकसभा में 117वें संविधान संशोधन बिल का खुला विरोध करेगी तथा लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख किया जायेगा कि केन्द्र में सरकार बनने पर भाजपा पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करेगी।

समिति का पहला सवाल- भाजपा ने सामाजिक न्याय के नाम पर पदोन्नति में आरक्षण का राज्यसभा में समर्थन किया है। सवाल यह है कि पदोन्नति में आरक्षण देकर अनुसूचित जाति/जनजाति के अति कनिष्ठ कार्मिकों को उनसे 2.-25 साल वरिष्ठ सामान्य व अन्य पिछडे़ वर्ग के कार्मिकों का बास व सुपरबास बनाना कौन सा सामाजिक न्याय है? भाजपा के सामाजिक न्याय की परिभाषा ने सामान्य व अन्य पिछड़े वर्ग के 78 प्रतिशत कार्मिकों के लिये कोई स्थान है या नहीं?

दूसरा सवाल- भाजपा के नेतृत्व वाली एन डी ए सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण के मसले पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का फैसला निष्प्रभावी करने हेतु जनवरी‘2... में 81वाँ संविधान संशोधन, जून-2... में 82वाँ संविधान संशोधन और जनवरी-2..2 में 85वां संविधान संशोधन किया। अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी करने हेतु भाजपा ने दिसम्बर-2.12 में 117वें संविधान संशोधन बिल को राज्यसभा में पारित करने में काँग्रेस का साथ दिया। सवाल यह है कि भाजपा मा. सर्वोच्च न्यायालय के प्रति सम्मान का भाव रखती है या नहीं तथा भाजपा यह भी स्पष्ट करें कि भविष्य में इस मामले में और कितनी बार संविधान को संषोधित किया जायेगा?

तीसरा सवाल- एक बार नौकरी पाने बाद सभी कार्मिकों के वेतन, भत्ते, सुविधायें और अधिकार समान हो जाते हैं फिर जातिगत आधार पर अनुसूचित जाति/जनजाति के कार्मिकों को अलग से पदोन्नति में आरक्षण देना कया संविधान की धारा 14, 15 व 16 में प्रदत्त समता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन नहीं है? संविधान संशोधन के पक्ष में मतदान करना मा. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अपमान तो है ही, भाजपा स्पष्ट करे कि पदोन्नति में आरक्षण का समर्थन कर क्या उसने क्या संविधान की अवमानना नहीं की है?

चैथा सवाल- चुनावों के पूर्व राजनीतिक दल चुनाव घोषणा पत्र में अपनी नीति का उल्लेख करते है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में कभी भी यह उल्लेख नहीं किया है कि पदोन्नति में आरक्षण प्रदान किया जायेगा। सवाल यह है कि चुनाव घोषणा पत्र में उल्लेख किये बिना राज्यसभा में पदोन्नति में आरक्षण बिल के पक्ष में मतदान कर भाजपा ने क्या अपने मतदाताओं के साथ धोखा व विष्वासघात नहीं किया है?

पाँचवाँ सवाल- पदोन्नति में आरक्षण देने से सामाजिक समरसता बिगड़ रहीं है और संविधान संशोधन बिल 17जून-95 से लागू होने से 18 वर्ष पूर्व से ज्येष्ठता सूचियाँ बदली जायेंगी जिससे प्रषासनिक अराजकता उत्पन्न हो जायेगी। ऐसे में 117वें संविधान संशोधन बिल का राज्यसभा में समर्थन कर अपने को राष्ट्रवादी पार्टी कहने वाली भाजपा ने क्या सामाजिक विघटन व प्रषासनिक अराजकता को बढ़ावा नहीं दिया है जो एक राष्ट्र विरोधी कृत्य है?

समिति ने चेतावनी दी है कि भाजपा अध्यक्ष ने उक्त सवालों के सन्तोषजनक जबाव न दिये तो सामान्य व अन्य पिछड़ें वर्ग के 78 प्रतिषत लोग आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा का विरोध करने हेतु बाध्य होंगे। समिति की आज यहाँ हुई बैठक में समिति के अध्यक्ष व अन्य प्रमुख पदाधिकारी एए फारूकी, ओम प्रकाश पाण्डेय, एसपी सिंह, चन्द्र भूषण पान्डेय, एसके चौधरी, चन्द्र प्रकाष अग्निहोत्री, आर.पी. उपाध्याय, राम राज दुबे, कायम रज़ा रिज़वी, आर.एस. शुक्ला, पीयूष गर्ग, कमलेश मिश्र, संजीव रतन, वाई.एन. उपाध्याय, पी.के. सिंह, ओ.एन. तिवारी, संदीप राठौर, डी.सी. दीक्षित, पवन कुमार मिश्रा, राजीव श्रीवास्तव, जी.एन. पाण्डेय, जगदीश सिंह, आर.पी. सिंह, रामपाल मिश्रा, नूर आलम, अश्विनी उपाध्याय, मोहन चन्द्र सोनी, शिव शंकर द्विवेदी, मूलषंकर मिश्र, रमाकांत यादव, त्रिवेणी मिश्र, सत्येन्द्र ओझा, सुबोध जोशी, के.के. शर्मा, अश्वनी कुमार सिंह, देवेन्द्र द्विवेदी, अवधेष चन्द्र शर्मा, अतुल मिश्रा, आर.पी. सिंह, अजय कुमार तिवारी, डी.के. सिंह, योगेन्द्र सिंह सम्मिलित हुये।

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