डेरा प्रमुख के खिलाफ सिक्ख 24 को करेंगे सिरसा बंद

जिलाभर में खुफिया एजेंसियां भी सर्तक हो गई है। क्योंकि कुछ बरस पहले डेरा व सिक्ख विवाद के चलते हरियाणा,पंजाब व राजस्थान में हालात काफी बिगड़ गए थे। सोमवार सांय आयोजित बैठक में सिक्ख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला,गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार सभा के अध्यक्ष एवं सीनियर सिक्ख नेता सुखविंद सिंह खालसा,बाबा प्रीतम सिंह,प्रकाश साहुवाला व शेर सिंह सहित कई सिक्ख नेता मौजूद थे। बैठक में मांग उठी की डेरा प्रमुख के खिलाफ सिक्खों पर कल हुए हमले के आरोप में मामला दर्र्ज होना चाहिए वहीं यह भी चर्चा हुई की बाबा पर रेप,हत्या सरीखे गंभीर आरोप के मामले दर्ज होने के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा हार्ई प्रोफाईल सिक्योरिटी देना सरासर गलत है अत: इसे सरकार तुरंत वापिस ले।
बैठक में बाबा की पेशी व बाहर आवागमन के दौरान सड़क पर खड़े होने वाले हजारों लठीधारकों को भी हटाने की मांग रखी गई। बैठक में निर्णय हुआ की अगर जिला प्रशासन व पुलिस ने उनकी मांगों पर 23 नवम्बर तक गौर ना किया तो वे 24 नवम्बर को रोष स्वरूप सिरसा बंद करेंगे। बता दें कि कल डेरा प्रमुख पड़ोसी प्रांत राजस्थान के गुरूसर मोडिया से सत्संग में भाग लेकर सिरसा लौट रहे थे तो जीवननगर के पास रोड़ पर तैनात डेरा प्रेमियों व सिक्खों बीच झड़प हो गई थी जिसमें तीन लोग घायल हुए थे। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने बीती देर सांय सिरसा- दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर टाऊन पार्क के पास जाम लगा दिया था जिसे प्रशासन ने देर रात्री काफी मशक्त के बाद खुलवाया था।
सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता पवन इंसा का कहना है कि डेरा का सिक्खों से कोई द्वेष नहीं है। लाखों की तादाद में सिक्ख समुदाय के लोग डेरा से जुड़े है। जो लोग बैठकें कर सिक्खों व डेरा में भेद की बात कर रहें है सही मायने में वे सिक्ख ही नहीं है बल्कि सिक्खों के नाम पर कलंक हैं। ये लोग दरार पैदा कर अपनी सियासी रोटियां सेक रहे है।












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