बुंदेलखंड से बदला ले रहे हैं अखिलेश यादव!

Akhilesh Yadav not focusing on Bundelkhand
लखनऊ (रामलाल जयन)। दैवीय आपदाओं और पिछड़ेपन का दंश झेल रहे उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में समाजवादी पार्टी (सपा) की हार का कसक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मंत्रिमंड़ल में भी सिर चढ़ कर बोल रहा है। यूं कहिये कि बुंदेलखंड में सपा को जो हार मिली है उसका बदला अब खुद सीएम साहब ले रहे हैं। मंत्रिमंड़ल में एक भी बुंदेली विधायक को जगह नहीं मिली है। राज्‍य सरकार में बुंदेलखंड मानों ‘अछूत' बना हुआ है। जब कि सपा के पास पांच विधायक इस मंडल से हैं।

यहां उन्नीस में से सिर्फ पांच बबेरू, कर्वी, मऊरानीपुर, उरई और गरौठा से सपा उम्मीदवार विजयी हुए। यानी बुंदेलखंडवासियों ने सपा के 14 विधायकों को अपना वोट नहीं दिया। सत्ता गवां चुकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को छह नरैनी, महोबा, मऊ-मानिकपुर, माधौगढ़, बबीना, महरौनी और ललितपुर सदर में सफलता मिली है। तत्कालीन मायावती सरकार में बुंदेलखंड से नसीमुद्दीन सिद्दीकी, दद्दू प्रसाद, बादशाह सिंह व बाबू सिंह कुशवाहा कैबिनेट और भगवती सागर व रतनलाल अहिरवार स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री थे।

मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने मत्रिमंड़ल में ज्यादातर पुराने लोगों को तरजीह दी है। कयास लगाए जा रहे थे कि दोबारा चुनाव जीते गरौठा से दीप नारायण सिंह यादव और बबेरू के विश्वम्भर सिंह यादव के अलावा मुलायम सरकार में राज्यमंत्री रह चुके उरई से तीसरी बार विधायक हुए दयाशंकर वर्मा (कोरी) को मंत्री जाएगा, पर अब तक यहां से किसी भी विधायक को ‘लाल बत्ती' नहीं नसीब हुई। इससे जहां बुंदेलखंड अखिलेश के लिए ‘अछूत' बना है, वहीं सभी पांच सपा विधायक किसी ‘गुनहगार' से कम नहीं दिखते।

आम लोगों की मानें तो उन्‍हें अब ऐसा लगने लगा है कि अखिलेश यादव उनसे कोई बदला ले रहे हैं। झांसी के शिक्षक अरुण सिंह चौहान का कहना है कि अगर यहां की जनता ने सपा के प्रत्‍याशियों को वोट दिये होते, तो सरकार जरूर बुंदेलखंड पर ध्‍यान देती। हो सकता है सरकार यहां के लोगों को यह जताने का प्रयास कर रही हो, कि देख लो हमें वोट देने का क्‍या परिणाम।

मंत्रीमंडल में विस्‍तार का आश्‍वासन

इस संबंध में जब वनइंडिया ने सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी से बात की तो उन्‍होंने कहा कि ‘निकट भविश्य में मंत्रिमंड़ल के विस्तार में बुंदेलखंड से कुछ विधायक शामिल किए जाएंगे, यह सरकार प्रदेश के किसी भी क्शेत्र से सौतेला व्यौहार नहीं कर रही।' बबेरू विधायक विश्वम्भर सिंह यादव का कहना कि ‘नेता जी (मुलायम सिंह) पर पूरा भरोसा है, अपना तो यह है कि फर्ज करो, फल नेता जी पर छोड़े हैं।

नब्बे के दशक में मुलायम सिंह यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके बांदा के बुजुर्ग समाजवादी चिंतक जमुना प्रसाद बोस भी बुंदेलखंड को तरजीह न दिए जाने पर हतप्रभ हैं, वह कहते हैं कि दो दशक में पहली बार ऐसा हुआ है, जब बुंदेलखंड का कोई विधायक मुख्यमंत्री के साथ शपथ नहीं ले सका। मुख्यमंत्री अखिलेश के सामने वजह कुछ भी रही हो, पर बुंदेलखंड का एक भी सदस्य शामिल न किए जाने से बुंदेली बेहद निराश हैं।

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