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बुंदेलखंड में ‘गुलाबी गैंग’ के बाद अब 'बेलन गैंग'

After Gulabi Gang now Belan Gang emerges in Bundelkhand
बांदा। बिग बॉस 6 में आप संपत पाल से जरूर मुखतिब हुए होंगे। जी हां वही संपत जो गुलाबी गैंग की सरगना हैं। बुंदेलखंड में ही अब इसी गैंग की तर्ज पर उभर रहा है 'बेलन गैंग'। इसे राजनीति करने की महत्वाकांक्षा कहा जाए या फिर महिला सशक्तीकरण के बढ़ते कदम, लेकिन पुरुषों से भिड़ने के लिये यह गैंग अब निकल पड़ा है।

गुलाबी गैंग की तुलना में इस गैंग में बहुत मामूली फर्क है, गुलाबी गैंग में महिलाओं की पहचान गुलाबी साड़ी और डंड़ा है, वहीं बेलन गैंग से जुड़ी महिलाएं आंदोलन के वक्त रोटी बनाने वाले ‘बेलन' से लैस रहती हैं।

बदहाल बुंदेलखंड में राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन में महिलाएं हाशिए पर थीं, जब पिछले पांच साल के दौरान महिलाएं घर का ‘चूल्हा-चैका' छोड़ खुद से जुड़े मुद्दों पर सड़क पर उतरीं, तब किसी ने यह नहीं माना था कि अब आधी आबादी अपने आजादी की लकीर खींच रही है। सम्पत पाल की अगुआई में गठित ‘गुलाबी गैंग' ने देश ही नहीं, विदेश में भी नाम कमाया। नतीजा यह रहा कि उन्हें पेरिस और इटली से भी महिला सशक्तीकरण पर आमंत्रण मिले।

सम्पत पाल उन महिलाओं के मुद्दों पर आवाज बुलंद की, जो उनके पास आयीं और संगठन की सदस्य बनीं। इधर, कांग्रेस ने बुंदेली धरा में राजनीतिक फायदा लेने की गरज से सम्पत को विधानसभा का चुनाव क्या लड़ाया, इससे तो संगठन की साख पर ही बट्टा लग गया।

कैसे बना बेलन गैंग

अब अगर बेलन गैंग की बात करें तो बांदा की रहने वाली पुष्‍पा गोस्वामी शहरी महिलाओं को एकजुट कर ‘बेलन गैंग' नाम से नवोदित संगठन बनाकर चर्चा में आ गईं हैं। इस संगठन से जुड़ी महिलाएं उन सभी मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल किये हैं, जिनसे महिलाएं अक्सर प्रभावित होती हैं। बिजली, पानी, स्वास्थ्य की अव्यवस्था हो या फिर रसोई गैस की कालाबाजारी, सभी मामलों में शहरी महिलाएं आन्दोलन करती नजर आ रही हैं।

बेलन गैंग की कमांडर पुष्‍पा गोस्वामी बताती हैं कि ‘रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले संसाधनों से अक्सर महिलाओं को ही जूझना पड़ता है, पुरुष महिलाओं की परेशानी से नावाकिफ रहते हैं। इसलिए अपने एजेंडे में ऐसे मुद्दे शामिल किये हैं।'

गुलाबी गैंग की वाइस कमांड़र सुमन सिंह चैहान स्वीकार करती हैं कि ‘सम्पत के विधानसभा चुनाव लड़ने से संगठन में राजनीतिक दल का ठप्पा लगा है और मुद्दों से भी भटका है।' पर, वह कहती हैं कि ‘जितने संगठन बनेंगे, आधी आबादी उतनी ही मजबूत होगी।'

उधर, सम्पत पाल का कहना है कि ‘वह कांग्रेस से चुनाव जरूर लड़ी हैं, पर महिला मुद्दों को पीछे नहीं धकेला। उनका पूरा ध्यान संगठन में पुरानी ऊर्जा लाने पर है।' वामपंथ से जुड़े बुजुर्ग अधिवक्ता रणवीर सिंह चैहान महिलाओं के उभरते संगठनों को अच्छा संकेत मान रहे हैं, उनका कहना है कि ‘अतीत में भी महिलाओं की भूमिका अहम रही है, 90 फीसद महिलाएं घरेलू या बाहरी हिंसा का शिकार होती हैं। कम से कम अब कुछ तो रोंक लगेगी।' वह किसी भी सामाजिक संगठन को राजनीतिक से दूर रहने की सलाह देते हैं।

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