मलाला को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ब्रिटेन सरकार का समर्थन
लंदन। लड़कियों की शिक्षा के पक्ष में चरमपंथियों के खिलाफ आवाज उठाने वाली मलाला यूसुफजई को नोबेल शांति पुरस्कार दिये जाने के पक्ष में आवाज उठायी जा रही है। ऑन लाइन चलाए जा रहे इस अभियान में अब तक लगभग हजार लोगों ने अपने हस्ताक्षर किये हैं और अब ब्रिटेन सरकार भी इसका समर्थन कर रही है। लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाने के कारण तालिबानियों ने स्कूल से लौटते वक्त मलाला को गोली मार दी थी,गोली लगने से वह बुरी तरह घायल हो गई थी अब उसका इलाज ब्रिटेन में चल रहा है जहां वह स्वास्थ्यलाभ कर रही है।

मलाला द्वारा उठाये गये कदम की दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है, संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) ने कल शनिवार (10 नवंबर) को 'ग्लोबल डे ऑफ ऐक्शन' के रूप में घोषित किया है। यूएन के प्रतिनिधि गॉर्डन ब्राउन इस समय पाकिस्तान में हैं और ऐसी लड़कियों के मामले में विचार-विमर्श कर रहे हैं जो अभी तक स्कूल नहीं जा पाई हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया था। जब ये रोक लगाई गयी थी तब मलाला सिर्फ 11 वर्ष की थी लेकिन उसने पढ़ना लिखना जारी रखा। मलाला ने बीबीसी की उर्दू सेवा के लिए 'गुल मकई' नाम से डायरी भी लिखी थी जिसमें उसने तालिबान द्वारा शिक्षा पर लगाये गये प्रतिबंधों के बाद लड़कियों की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में लिखा था।
मलाला को नोबेल पुरस्कार देने का समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि 'मलाला अब लड़कियों की शिक्षा का एक प्रतीक बन चुकी है। उसके द्वारा किये गये कार्यों को पहचान मिलनी चाहिए। वह सिर्फ पाकिस्तान की नागरिक नहीं बल्कि उनके लिए एक आवाज है जो किसी भी कारण से भेदभाव का सामना कर रही हैं। वहीं पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री सरदार शहजेहान यूसुफ ने मलाला यूसुफजई ने कहा है कि 'मलाला साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है।












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