ओबामा से भारत को फायदा नहीं तो नुकसान भी नहीं

भारत के लोग रोमनी से ज्यादा बराक ओबामा की जीत के लिए प्रार्थना कर रहे थे उनकी नजर में ओबामा, रोमनी से बेहतर थे। भारतीयों को लगता है कि ओबमा की जीत से अगर इंडिया को कोई फायदा नहीं होगा तो नुकसान भी नहीं होगा क्योंकि पिछले चार सालों में ओबामा ने भारत के लिए अगर फायदा नहीं किया तो नुकसान भी नहीं किया है।
लेकिन एक बात बिल्कुल चौंकाने वाली है कि ओबामा की नीतियां भारत की अर्थव्य्वस्था के खिलाफ है क्योंकि ओबामा ने अपने पूरे चुनाव प्रचार में लगातार आऊटसोर्सिंग की बात कही है जो कि भारत के लिए एक चिंता का विषय है। भारतीय अर्थ शास्त्रियों की बात करें तो उन्हें नहीं लगता कि यह भारत के लिए घातक है क्योंकि आईकंपनियोंका बिजनेस अब भारत में इस कदर फैल चुका है जिसे हटाना अमेरिका के लिए भी आसान नहीं है।
अमेरिका का बिजनेस और इकोनामी काफी हद तक भारत के बुद्धिमान इंजीनियरों के जरिये चलती है। उसे कम लागत में अच्छे इंजीनियरों की पूर्ति केवल भारत ही कर सकता है इसलिए अगर ओबामा अपने आउटसोर्सिंग की बात करते हैं तो भी इससे नुकसान चीन को ज्यादा होगा क्योंकि उसके पास खोने को बहुत कुछ है जो कि भारत के पास नहीं है, हां यह चिंता का विषय जरूर है लेकिन गंभीर समस्या नहीं है।
जहाँ तक छात्रों की बात है तो उनका मानना है कि विदेशी छात्रों को ज़्यादा संख्या में अमरीका बुलाना और स्कॉलरशिप देना अमरीका की ज़रूरत है, हालांकि आर्थिक हालातों के चलते विदेशी छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप में कमी आई है लेकिन यह भारत के लिए खतरा नहीं हो सकता है क्योंकि अभी भी अमेरिका विदेशी छात्रों को जितनी स्कालरशिप दे रहा है वो भारतीयों के हिसाब से काफी अधिक है।
इसलिए ओबामा की जीत भारतीय को लिए नुकसानदेह तो नहीं लग रही है लेकिन हां इस जीत को फायदे में बदलने के लिए भारतीय नेतृत्व को आगे आना होगा ताकि भारत के होनहार नौनिहालों और आईटी क्षेत्र को मजबूत इंजीनियरों को इस जीत का फायदा मिल सके।












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