श्रीप्रकाश का भद्दा बयान- औरत पुरानी होने पर मजा कम हो जाता है
कानपुर। कहते हैं देश की राजनीति बहुत गंदी हो चुकी है, गंदे लोगों से भरी हुई है। इस बात से इतर जाकर सोचने के प्रयास करें भी तो कैसे, जब श्रीप्रकाश जायसवाल जैसे लोग केंद्र में मंत्री पद पर बैठे हों। आपको शायद यह सुनकर हैरानी नहीं होगी कि कोयला मंत्री औरतों को महज भोग की वस्तु समझते हैं। शायद इसीलिये उनके दिमाग की गंदगी एक कवि सम्मेलन में बाहर आ गई।
उन्होंने कहा, "नई नई जीत और नई नई पत्नी का जश्न सब मनाते हैं। जैसे जैसे समय बीतेगा, जीत पुरानी होती जाती है, जैसे जैसे समय बीतता है पत्नी पुरानी होती जाती है, वो मजा नहीं रहता है।"
जायसवाल ने यह बयान भले ही मजाकिया लहज़े में दिया हो, लेकिन यह बयान उनकी गंदी सोच को प्रदर्शित करता है। जरा सोचिये अगर मंत्री खुद ऐसे बयान देंगे तो क्या होगा, देश के उन लोगों का जो महिलाओं को वाकई में भोग की वस्तु समझते हैं।
मजेदार बात यह है कि केंद्रीय मंत्री ने यह बयान कहीं और नहीं बल्कि एक गर्ल्स कॉलेज में दिया है। उनके इस ओछे बयान का विरोध देश भर में शुरू हो गया है। शुरुआत कानपुर से हुई है, जहां लोगों ने सड़कों पर जायसवाल का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों में अधिकांश महिलाएं शामिल थीं।
अब सवाल यह उठता है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी जो खुद एक महिला हैं, इस बयान पर श्रीप्रकाश जायसवाल के खिलाफ क्या ऐक्शन लेती हैं?
श्रीप्रकाश के खिलाफ लोगों ने क्या कहा, उनकी तस्वीर के सामने जरूर पढ़ें-

श्रीप्रकाश जायसवाल
श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा, "जीत और औरत जब तक नई रहती हैं, तभी तक मजा रहता है। जैसे पत्नी जब पुरानी हो जाये तो मज़ा चला जाता है, वैसे ही जीत पुरानी होने पर होता है।" मंत्री जी हमें आपसे यह सवाल पूछा नहीं चाहिये, लेकिन क्या आपके खुद पर यह बयान लागू होता है। जरा सोचिये आपकी बेटी, पत्नी, बहनें आपके इस बयान को सुनने के बाद क्या सोच रही होंगी?

पद से हटाओ इन्हें- स्मृति ईरानी
भाजपा महिला प्रकोष्ठ की कार्यकर्ता व अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने श्रीप्रकाश जायसवाल का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार के लोगों की सोच और ज़ुबान दोनों कोयले की तरह काली हो गई है। ऐसे नेता का मंत्री पद पर बने रहना देश की बेइज्जती है। मैं प्रधानमंत्री से मांग करती हूं कि वो तुरंत श्रीप्रकाश जायसवाल को मंत्री पद से हटायें। भाजपा भी इस बात का कड़ा विरोध करती है।

सुभाषिनी अली
महिलाओं के अधिकारों की जंग लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी अली ने कहा है कि सड़क किनारे लड़कियों से छेड़-छाड़ करने वालों और श्रीप्रकाश जायसवाल में कोई फर्क नहीं रह गया। बल्कि अब तो ऐसे लोगों का मनोबल और बढ़ेगा और वे लड़कियों से और छेड़छाड़ करेंगे, जाहिर है अब तो वे यही सोचेंगे कि जब मंत्री ऐसा कर रहे हैं, तो हम क्यों न करें।

डा. आलोक चांटिया
अखिल भारतीय अधिकार संगठन के अध्यक्ष व शिक्षाविद डा. आलोक चांटिया ने कहा केंद्र सरकार और सत्ताधरी सरकार की ओर से दिया गया अशोभनीय बयान है। इससे पता चलता है कि ये लोग किस नजर से महिलाओं को देखते हैं। आज 2 अक्टूबर को जहां हम गांधी जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने देश के लिये आहूति दी और फिर भारत माता को हमने अपनी मां कहा। मां-बहनों का अपमान देख गांधी जी की आत्मा को ठेस जरूर पहुंची होगी।

आम जनता ने पुतला फूंका
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर आम जनता में गुस्सा भरा हुआ है। लखनऊ की शिक्षिका सुरभि सक्सेना का कहना है कि कोयले की कालिख में ऐसे नेताओं की मानसिकता भी काली हो जाती है। पीएचडी छात्रा अदिति पाठक का कहना है कि यह बुढ़ापे का नतीजा है। बेहतर होगा यदि देश को युवा नेता दिये जायें।

आम लोगों का गुस्सा
आम लोगों की बात करें तो केंद्रीय कर्मचारी दीपेंद्र कुमार कहते हैं कि आज के नेताओं से हम गांधी जीके विचारों की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। लखनऊ के छात्र सुमित कुमार ने पूछा है कि जायसवाल के खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एक हो जाना चाहिये। और उन्हें मंत्री पद से उतार देना चाहिये।












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