पवार के पावर से घबरायी महाराष्ट्र सरकार
सिंचाई घोटाले में नाम आने के बाद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार उर्फ दादा ने इस्तीफा सौंप दिया है। जिसे सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वीकार भी कर लिया है। भले ही अजीत पवार यह कहे कि निष्पक्ष जांच हो इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है लेकिन इस फैसले से शरद पवार की त्यौरियां चढ़ा दी है। शरद पवार को अपने भतीजे का इस्तीफा देना अच्छा नहीं लगा है जिसके चलते कहा जा रहा है कि हो सकता है कि पवार भी यूपीए का साथ छोड़ दें।
पवार के पावर से बच पायेगी यूपीए!
खबर है कि पवार की पार्टी एनसीपी के विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार से महाराष्ट्र सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग की है। कहा है कि अगर अजीत महाराष्ट्र सरकार में नहीं तो हम भी मंत्री पद पर नहीं रहेंगे। फिलहाल पवार ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
वहीं दूसरी ओऱ सीएम पृथ्वीराज चव्हाण दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं, टीवी चैनलों पर चल रही बहस के मुताबिक मनमोहन सरकार पवार के पावर को अपनी ओर करने की पूरी कोशिश करेगी इसलिए हो सकता है कि अब डिप्टी सीएम शरद पवार के भतीजे की जगह बेटी सुप्रिया सुले को दे दिया जाये ताकि घर की बात घर में ही रह जाये। देखना दिलचस्प होगा कि शरद पवार को अपने साथ खुशी से साथ रखने के लिए मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी कौन सा कदम उठाते हैं?
गौरतलब है कि साल 2009 में अजित पवार सिंचाई मंत्री के पद पर थे। इस दौरान उन्होंने सिंचाई से जुड़े 32 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जिनमें ज्यादातर प्रोजेक्ट 20 हज़ार से 25 हज़ार करोड़ के थे लेकिन साल, 2012 में सिंचाई विभाग के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर विजय पंधारे ने राज्य के सचिव को चिट्ठी लिखकर 35 हज़ार करोड़ के घोटाले की बात कही है जिस पर विपक्ष ने हंगामा किया और बात अजीत के इस्तीफे पर आकर खत्म हुई।













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