फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम

ऐसा बताया जा रहा है कि अगले महीने तेल कंपनियां हमे भारी झटका देने की तैयारी कर चुकी है। अब तो सरकार भी यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि पेट्रोलियम पदार्थो के दामों की बढ़ोत्तरी अब तेल कंपनियों के हाथ में है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर कंपनियां तेल का दाम तय करेंगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का मूल्य बढ़ता है तो बढ़ाएंगी और कम होता है तो घटाएंगी।
होने वाली मूल्य बढ़ोत्तरी के पिछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेलों के ऊंचे दाम, कमजोर मानसून, रूपये का गिरना, और बिजली की कटौती होने के कारण डीजल की खपत को बताया जाएगा। अभी कुछ महीने पहले तेल के दाम में बढ़ोत्तरी की गई थी तो कंपनियां बढ़-चढ़कर अपना घाटा पेश कर रही थी। ऐसे में अब अधिकारी कह रहे हैं कि तेल के दामों में बढ़ोत्तरी करना अब जरूरी है, क्योंकि अब घाटा सहने योग्य नहीं है।
सूत्रों के अनुसार तेल कंपनियां अब सरकार से मिलकर यह फैसला करने की तैयारी कर रही है कि पेट्रोलियम पदार्थो के दामों में कितनी बढ़ोत्तरी की जाए। डीजल रसोई गैस और केरोसीन के दामों के बढ़ने की ज्यादा आशंका है क्योंकि इनके दाम पिछले 14 महिनों से नहीं बढ़े है। डीजल की खपत भी 13.7 प्रतिशत बढ़ी है। ऐसी भी आशंका है कि घरेलू गैस के दामों में 50 से 100 रूपए तक की बढ़ोत्तरी की जा सकती है।












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