कोयला से ज्यादा काली यूपीए, किया 1.86 लाख करोड़ का घोटाला

सबसे शर्मनाक बात यह है कि कोयला विभाग किसी छोटे-मोटे मंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के हाथ में था। प्रधानमंत्री की नाक के नीचे देश का सबसे बड़ा घोटाला हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी। रिपोर्ट के मुताबिक 2004 से लेकर 2009 तक जितने भी कायला खानों के खनन के लिये आवंटन हुए, उनमें बिना नीलामी आवंटन कर दिये गये।
इसमें सरकार को करीब 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इससे यह भी साफ है कि 100 से ज्यादा निजी कंपनियों को भारी मुनाफा हुआ है। जाहिर है निजी कंपनियों के मुनाफे में सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को भी करोड़ों का लाभ पहुंचा है। खास बात यह है कि 1.86 करोड़ का नुकसान सिर्फ निजी कंपनियों को ध्यान में रखते हुए आंका गया है, सरकारी व अर्द्धसरकारी कंपनियों को साथ लें तो घाटा कहीं ज्यादा है।
केंद्र का पक्ष
केंद्रीय मंत्री नारायण स्वामी ने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट नहीं है। सरकार इसे पीएसी से चेक करायेगी उसके बाद ही कोई फैसला किया जायेगा। इस रिपोर्ट की जांच के बाद सही आंकलन हो सकेगा। इसलिये सरकार पर आरोप लगाना गलत होगा।
विपक्षी दलों का हमला
भारतीय जनता पार्टी ने एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूब चुकी है और अब न तो सरकार को बने रहने का अधिकार है और न मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार है। पीएमओ के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये।
लालू हुए मौन, सपा का आग बबूला
इस मामले पर लालू प्रसाद यादव ने न केंद्र को कोसा न उसका पक्ष लिया। लालू ने कहा कि इस रिपोर्ट की जांच के बाद ही कुछ कहा जाना चाहिये। वहीं सपा के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि सरकार घपलेबाजों की सरकार हो गई है। यूपीए के नेता देश में सिर्फ घोटाले करने के लिये सत्ता में बैठे हैं।












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