अपना नहीं अंग्रेजों का है लखनऊ का चिड़ियाघर

Lucknow Zoo still belongs to British Empire
लखनऊ। अंग्रेज़ तो देश छोड़कर चले गए लेकिन आज भी अंग्रेजो की निशानियां यहां आबाद हैं। लखनऊ की शान प्राणी उद्यान जिसे लोग चिडिय़ाघर के नाम से पुकारते हैं वह आज भी अंग्रेजों की सम्पत्ति है। प्रिंस ऑफ वेल्स जुलोजिकल गार्डेन का नाम बदलकर लखनऊ प्राणि उद्यान तो कर दिया गया लेकिन सरकारी दस्तावेजों व बैंक खातों को देखकर पता चलता है कि आज भी यह अंग्रेजी सोसायटी के नाम पंजीकृत हैं तथा यूपी सरकार प्रिंस ऑफ वेल्स जुलोजिकल सोसाइटी का अनुदान देती है ताकि यहां के पशु पक्षियों का पालन पोषण हो सके। देश व प्रदेश के लिए यह बहुत ही अफसोस की बात है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी चिडिय़ाघर प्रदेश सरकार का नहीं हो पाया है।

वर्ष 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स लखनऊ आए तो यहां के राजाओं व नवाबों ने उनके स्वागत में चिडिय़ाघर की स्थापना कर दी और इसका नाम उनके नाम पर रखकर उन्हें खुश करने का प्रयास किया। उस वक्त इसे प्रिंस ऑफ वेल्स जुलोजिकल गार्डेन के नाम से पुकारा गया, तथा इसे प्रिंस ऑफ वेल्स जुलोजिकल सोसायटी के नाम से पंजीकृत कराया गया। बैंक में इसी नाम से खाता भी खोला गया ताकि सरकारी अनुदान का आदान प्रदान हो सके।

समय बदला देश आजाद हो गया लेकिन चिडिय़ाघर का नाम नहीं बदल सका। लोगों के भारी विरोध व समाजिक संगठनों के एतराज करने के बाद वर्ष 2001 में किसी प्रकार इसका नाम बदलकर लखनऊ प्राणि उद्यान कर दिया गया लेकिन बैंक खातों में परिवर्तन नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि अभी इसमें कुछ कानूनी अड़चनें हैं जिस कारण बैंक खाते का परिवर्तन लखनऊ प्राणि उद्यान के नाम नहीं हो सका। उधर चिडिय़ाघर के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि अब वह बैंक खातों में बदलाव कर देंगे। ज्ञात हो कि बैंक ऑफ इण्डिया तथा स्टेट बैंक में प्रिंस ऑफ वेल्स जुलोजिकल सोसायटी के खाते हैं जिसमें यूपी सरकार अनुदान देती हैं। इतिहासकारों का कहना है कि सरकार के लिए शर्म की बात है कि जिलों, संस्थाओं व पार्कों के नामों में बदलाव किए जा रहे हैं लेकिन किसी को यह ध्यान नहीं कि चिडिय़ाघर भी अंग्रेजों की विरासत बनी हुई हैं उसमें भी बदलाव की जरूरत है।

कुछ और सम्पत्ति जो अंग्रेजों के नाम पर हैं

किंग जार्ज मेडिकल युनिवर्सिटी- जिसके नाम परिवर्तन को लेकर विधान भवन से लेकर मेडिकल युनिवर्सिटी तक जमकर हंगामा हुआ। किंग जार्ज मेडिकल कालेज अंग्रेज शासक के नाम पर है जिसने हिन्दुस्तानियों को कभी इंसान नहीं समझा और तमाम जुल्म किए।

क्वीन मेरी महिला चिकित्सालय- क्वीन मेरी भी किंग जार्ज मेडिकल कालेज की ही सम्पत्ति हैं जहां महिलाओं का इलाज होता है। क्वीन मेरी किंग जार्ज की पत्नी का नाम था।

कैम्पवेल रोड- अंग्रेज सेनानायक कॉनिल कैम्पवेल जिसने कानपुर से लखनऊ आकर हिन्दुस्तानी जनता पर जुल्म किए। इस दुर्दान्त सेनानायक ने 1887 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में सैकड़ों हिन्दुस्तानियों को मारा था। कई सुहागिनों का सुहाग उजाडऩे वाले कई मांओं की गोदे सूनी कर देने वाले इस सेनानायक के नाम पर आज भी लखनऊ में एक सड़क आबाद है जो राजाजीपुरम में हरदाई रोड से जोड़ती है।

क्लाइड रोड बिजली घर- अंग्रेजों व उनकी हैवानियत की याद दिलाने वाली सम्पत्तियों में एक बिजली घर भी शामिल है। हजरतगंज के सिकन्दराबाग चौराहे के निकट बने बिजली घर का नाम सरकारी दस्तावेजों में क्लाइड रोड विद्युत उपकेन्द्र दर्ज है।

बटलर पैलेस कालोनी- राजधानी लखनऊ की दूसरी आलीशान सरकार कालोनी यानि बटलर पैलेस कालोनी का नाम सर हारकोर्ट बटलर के नाम पर है। बटरल प्रदेश का पहला अंग्रेज गर्वनर था जिसने यहां आकर लोगों पर जुल्म ही किए। इन सारी बातों के बावजूद प्रदेश सरकार इन सम्पत्तियों के नामों पर परिवर्तन नहीं करना चाहती है।

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