ऑनर किलिंग में बाप बेटे को फांसी की सजा

मैथलीशरण की अविवाहित बेटी गीता और उसके घर के सामने रहने वाले विजय के शादीशुदा बेटे सुनील से संबंध थे। एक साथ दोनों को देखकर आपा खो बैठे मैथलीशरण ने बेटों की मदद से बड़ी बेरहमी से मार डाला था। सुनील को तो बलकटी से जानवरों की तरह काट डाला गया था।
एडीजीसी क्रिमिनल अजय शंकर शर्मा ने बताया कि न्यायधीश राजेन्द्र बाबू शर्मा ने ऑनर किलिंग पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की नजीर देते हुए हत्यारे बाप-बेटे को सजा-ए-मौत सुनाई। 40 पन्नों के आदेश में दोनों पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। इसमें से आधी रकम सुनील के परिवार वालों को दी जाएगी।
आज सुबह से ही बागपत समेत आस-पास के लोगों की टकटकी अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) की अदालत पर लगी रही। गौरतलब है 28 दिसंबर 2007 को प्रेमी युगल सुनील और गीता का कत्ल किया गया था।
सुनील और गीता के मकान आमने-सामने थे। दोनों गुर्जर थे। हालांकि सुनील शादीशुदा था जबकि गीता अविवाहित। प्रेम प्रसंग का पता गीता के परिवार वालों लग गया । फिर गीता को उन्होंने सुनील से मिलने से मना कर दिया। 28 दिसंबर 2007 की रात करीब तीन बजे दोनों के घर के पास हरिजन बस्ती में रामे के खाली पड़े मकान से सुनील के जोर जोर से चीखने - चिल्लाने की आवाज आई - बचाओ - बचाओ। सुनील के पिता विजय, उनके भतीजे वेद प्रकाश, हरेन्द्र, संजीव दौड़कर वहां पहुंचे।
उनके सामने ही गीता के पिता मैथलीशरण और भाई हरेन्द्र और राहुल बलकटी से संजीव को काट रहे थे। गीता मरी पड़ी थी। उन्हें देखकर तीनों भाग गए। बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उनकी बलकटी, भाला और डंडा बरामद कर लिया। डबल मर्डर की रिपोर्ट विजय ने नामजद दर्ज कराई थी। पुलिस ने 15 जनवरी 2008 को चार्जशीट दाखिल की। 19 अगस्त 2008 को आरोप तय किए गए। मुल्जिमों में राहुल नाबालिग था।












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