संत गोपाल दास के 42 दिन के अनशन की जीत

सीएम के दूत बन कर उनके राजनीतिक सलाहकार प्रो. विरेंद्र अनशन खत्म कराने कुरुक्षेत्र पहुंचे। संत गोपाल दास ने 43वें दिन सरकार के सार्वजनिक तौर पर गोचारिणी भूमि मुक्ति की घोषणा होने पर जूस पीकर आमरण अनशन तोड़ा। सीएम के राजनीतिक सलाहकार प्रो. विरेंद्र सिंह और संत गोपालदास की भतीजी नैंसी ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वा या।
अनशन खत्म होने पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली। 43वें दिन प्रो. विरेंद्र सिंह ने सार्वजनिक तौर पर प्रदेशभर में गोचरान भूमि मुक्त कराने की घोषणा की। इसके बाद संत गोपालदास ने अनशन खत्म करने की घोषणा की। प्रो. विरेंद्र ने कहा कि सभी जिलों के डीसी को पत्र भेजा गया है। इस बारे में मुख्यसचिव पीके चौधरी ने शुक्रवार को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि गोचरान भूमि पर जिन लोगों का कब्जा है, उन्हें तुरंत इसे खाली कराने का नोटिस भेजा जाए।
अनशन खत्म कराने के बाद पत्रकारों से चर्चा में प्रो. विरेंद्र ने कहा कि सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में गोचारिणी भूमि मुक्ति के लिए डीसी को नोटिस भेज दिया है। अधिकारी जल्द से जल्द अवैध रूप से कब्जेधारियों को नोटिस भेजकर गोचरान भूमि को खाली कराएं।
इसके साथ साथ अनशन के दौरान गोभक्तों पर दर्ज हुए केसों को भी रद्द करने की घोषणा की। इस मौके पर डीसी मंदीप सिंह बराड़, एसपी राकेश आर्य, एडीसी सुमेधा कटारिया, सिविल सर्जन डा. वंदना भाटिया, एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू, सीटीएम अशोक बांसल, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयभगवान शर्मा, मेवा सिंह विशेष तौर पर उपस्थित थे।
संत गोपाल दास ने 14 दिन तक अस्पताल में नजरबंद रहकर शुक्रवार को पुरुषोत्तमपुरा अनशन स्थल पर पहुंचकर राहत की सांस ली। संत समाज ने बाकायदा इसके लिए मंच सजाया था। संतों ने फूलमालाओं से उनका स्वागत किया। जबकि दूर दराज से पहुंचे गोभक्तों ने संत मुनि के आने पर खड़े होकर उनकी तपस्या को सलाम किया।












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