सत्ता की नहीं यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई है: टीम अन्ना

इसमें कहा गया है कि राजनीतिक दल यह कहते आये हैं कि अन्ना और उनके समर्थक चुनाव नहीं जीत सकते इसलिये राजनीतिक विकल्प की बात करना जरूरी है। बयान में कहा गया है कि टीम अन्ना ने राजनीतिक दलों से मुकाबले के लिये राजनीतिक युद्धभूमि मैं उतरने का बिगुल फूंक दिया है। अब लोगों को फैसला करना है कि क्या भ्रष्ट व्यवस्था उनका शोषण करती रहेगी अथवा वह सही विकल्प का समर्थन करेंगे। टीम अन्ना की कोर समिति की सदस्य मेधा पाटकर ने चेताते हुए कहा, चुनावी राजनीति में आने से पहले किसी को भी 100 बार सोचना चाहिये।
अगर वह राजनीति में उतरते हैं तो आंदोलन की गति धीमी नहीं पड़नी चाहिये। जब अच्छे इरादों के साथ लोग राजनीति में उतरते हैं तो वह या तो ज्यादा नहीं टिक पाते या ज्यादा हासिल नहीं कर पाते। वहीं किरण बेदी ने इस फैसले का बचाव करते हये कहा कि अन्ना का आह्वान यही है कि वह अच्छे और चरित्रवान लोगों की पहचान करेंगे ताकि वह राजनीति में आ सकें। साथ ही प्रशांत भूषण ने कहा कि वह इस कदम को अनिच्छा से उठा रहे हैं पर लोग हमेशा से ही यही कहते आये हैं कि वह राजनीतिक विकल्प क्यों नहीं पेश करते। पिछले दस दिन से अनशन पर बैठे मनीष सिसौदिया ने कहा कि अब गेंद लोगों के पाले में है कि किस तरह इस लड़ाई को संसद तक ले जाया जाये। उन्होंने कहा कि यह पार्टी बनाने से संभव हो पायेगा या लोगों की मदद से होगा अथवा कोई अन्य रास्ता उभर कर आयेगा। लोग अभी अपने सुझाव भेज रहे हैं। मुख्य बात यह है कि इस अभियान को सड़क से संसद तक ले जाने की जरूरत है।












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