असम के जख्म पर पीएम ने लगाया 300 करोड़ का मरहम

साथ ही उन्होंने वादा किया कि प्रदेश में हुई झड़पों के चलते जिन 45 लोगों की जान गई और दंगे के चलते जो लाखों लोग बेघर हो गए, उनकी समुचित जांच होगी।
आपको बताते चलें कि मनमोहन सिंह बीते दिन सुबह कोकराझार पहुंचे। जहाँ उन्होंने राहत शिविरों का दौरा कर बोडो और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हुईं झड़पों के शिकार लोगों से मुलाकात की। उन्होंने राज्य के लोगों से शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
निरिक्षण के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में जातीय विवाद को स्वीकार्य नहीं किया जायगा और इसे हर हाल में बंद करना ही होगा। उन्होंने ये भी कहा कि लोगों में सुरक्षा की भावना बहाल करने की जरूरत है। अभी घावों में मरहम लगाने का समय है।
असम से राज्यसभा सदस्य सिंह दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित कोकराझार जिले में राहत शिविरों में प्रभावित लोगों से मिले। जहां उन्होंने सभी तरह की सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया।
हालात का जायजा लेते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि बोडो टेरिटोरिटल एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक्ट , धुबरी, कोकराझार और आसपास के जिलों में रहने वाले गैर बोडो मुसलमान भारत के ही नागरिक हैं।
सभी लोगों को एकजुटता से रहना चाहिए। हालांकि मनमोहन ने यह भी माना कि बीटीएडी में बोडो और गैर बोडो समुदायों के बीच हालात काफी जटिल हैं। इलाके में शांति लौटने के बाद इन जटिलताओं की समीक्षा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कोकराझार के दो राहत शिविरों में लोगों से मिलकर उनका दर्द भी सुना।
ज्ञात हो कि असम का निचला इलाके का शुमार बोडो बहुल इलाकों में होता है जहां गैर बोडो मुसलमानों के बांग्लादेशी मूल का होने की बात कही जाती रही है। दोनों पक्षों के बीच दशकों से जमीन को लेकर चल रही खींचतान इस बार कुछ ज्यादा ही हिंसक हो उठी है।
आपको बताते चलें कि सेना और अर्धसैनिक बल इन क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं। रात का कफ्र्यू जारी है। अब हालात सामान्य हो रहे हैं। 150 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।












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