नहीं चलेगी महिला सरपंचों के पतियों की दबंगई

यदि किसी सदस्य का पति व रिश्तेदार दबंगई से बैठक में शामिल होने का प्रयास करेगा तो उसे गिरफ्तार कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने का मुकदमा पंजीकृत कराया जाएगा। प्रमुख सचिव पंचायती बीएम मीना ने इस आदेश से सभी मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों को आगाह कर दिया है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान की ओर से यदि कोई सम्बंधी सरकारी विभाग से पत्राचार करे तो उसे स्वीकार न किया जाए।
शासनादेश के अनुसार यह सारा कार्य महिला प्रतिनिधियों को स्वयं करना होगा और पति एवं संबंधियों के जबर्दस्ती हस्तक्षेप करने पर प्रधानों एवं सदस्यों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। शासनादेश में मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ग्राम पंचायत बैठकों में महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति व संबंधी न उपस्थित रहें। इतना ही नहीं पत्रावलियों में किसी रिश्तेदार के हस्ताक्षर भी मान्य नहीं होंगे।
जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत की बैठक होने के पहले संबंधित पंचायत के सचिव द्वारा जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा जिला पंचायत राज अधिकारी को बैठक की लिखित सूचना दी जाएगी। जिलाधिकारी इन बैठकों के लिए अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी को पर्यवेक्षक नामित करने के लिए अधिकृत करेंगे।
इन सारी बातों की निगरानी हेतु बैठकों की वीडियोग्राफी करायी जाएगी। यह भी निर्देश दिया गया है कि निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों के साथ यदि उनके पति अथवा संबंधी बलपूर्वक बैठक में शामिल होते हैं तो उनके विरूद्ध शासनादेश के उल्लंघन एवं सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचित महिला प्रतिनिधि सरकारी पत्राचार अपने हस्ताक्षरों से ही करेंगी।












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