छत्‍तीसगढ़ से ढाई साल में गायब हो गईं 1300 लड़कियां

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रायपुर। देश के विभिन्‍न राज्‍यों से आ रहीं खबरों से सरकार भले ही आराम की नींद में डूबी हो, लेकिन बेटियों के माता-पिता चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। जरा सोचिये उन मां-बाप का क्‍या होगा जिनकी बेटियां घर से गायब हो गईं और उनका आज तक पता नहीं चला।

हम बात कर रहे हैं छत्‍तीसगढ़ की जहां पिछले ढाई साल में 5 हजार से ज्‍यादा लड़कियां गायब हो गईं। इस दौरान 3700 लड़कियां वापस घर लौटीं, लेकिन बाकी की करीब 1300 का क्‍या हुआ, कुछ पता नहीं। उनका क्‍या हुआ पता नहीं। जिंदा हैं या मर गईं, किसी घर की बहू बनीं या नौकरानी या फिर देह व्‍यापार में झोंक दी गई। इनमें से एक भी सवाल का जवाब पुलिस के पास नहीं है।

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के विधायक हरिदास भारद्वाज ने इस संबंध में सवाल किया। खास बात यह है कि गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने बताया कि वर्ष 2010, 2011 और 20 जून 2012 तक की अवधि में राज्य में 5121 लड़कियों के गुम होने और 18 लड़कियों को बेचे जाने की शिकायत मिली है। कंवर ने बताया कि इस अवधि में 3700 लड़कियों को वापस घर लाया गया है तथा 671 प्रकरण दर्ज कर 762 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

सरकार कार्रवाई करेगी या नहीं इस बात का बिना कोई आश्‍वासन दिये यह कह दिया कि राज्य में लड़कियों के गायब होने और बेचे जाने से रोकने के लिए सायबर प्रकोष्ठ की मदद ली जा रही है तथा राज्य के आठ जिलों में मानव तस्करी निरोधक प्रकोष्ठ का गठन केंद्र सरकार की स्वीकृति से किया गया है।

गृहमंत्री ने बताया कि अंतरराज्यीय सीमा में स्थित जिलों में बस संचालकों की बैठक कर बाहर जाने वाले बसों की आकस्मिक जांच कराई जा रही है। जशपुर जिले में अभी तक इस तरह की जांच से 15 लड़कियों को बचाकर परिजनों को सौंपा गया है।

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