अब गावों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराएगा डीआरडीओ

इस तकनीक के जरिए दुनिया के किसी एक कोने में बैठे विशेषग्य से किसी बीमारी या चोट आदि के इलाज के बारे में जानने के लिए संपर्क किया जा सकता है। सुदूर इलाकों में, जहां बहुत कम डॉक्टरों की तैनाती होती है, वहां यह तकनीक खास तौर पर मददगार होगी।
इसमें एक ऐसा सिस्टम लगाया जाएगा जो मरीज के ईसीजी, रक्त दाब, श्वसन दर, धड़कन की दर, शरीर का ताप आदि की जानकारी अपने लैपटॉप की मदद से उपग्रह के जरिए स्वास्थ्य केंद्र तक भेज देगा। इन्हें देखकर डॉक्टर मरीज के लिए जरूरी निर्देश दे सकेंगे।
डीआरडीओ के महानिदेशक डॉक्टर वी के सारस्वत ने इस विषय पर कहा कि , सैन्य शिविरों में इस तकनीक का इस्तेमाल सैनिक द्वारा पहले से किया जा रहा था। अब इसे गांवों और जन स्वास्थ्य केंद्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। उन्होने कहा कि हमने इस तकनीक को व्यवसायिक रूप देने का फैसला किया है।
साथ्ा ही उनके द्वारा ये भी कहा गया कि इस तकनीक को ग्रामीण इलाकों में प्रचलित करने के लिए डीआरडीओ ग्रामीण विकास मंत्रालय से भी बातचीत कर रहा है। आपको बता दें कि टेलीमेडिसिन के इस पोर्टेबल तंत्र का विकास बैंगलोर के डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लैबोरेट्री में किया गया था।












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