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राष्ट्रपति चुनाव में एमपी, एमएलए को व्हिप जारी करना अपराध: आयोग

No party whip allowed in President election, says Election Commission
अगले हफ्ते होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक पार्टियां राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने या नहीं करने के लिए अपने सदस्यों को कोई निर्देश या व्हिप जारी नहीं कर सकती क्योंकि ऐसा करना अनुचित प्रभाव के अपराध के समान होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करना अनिवार्य नहीं है और मतदान करना या न करना दलबदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आयेगा यानी इस कानून के तहत आयोज्ञ ठहराये जाने का खतरा नहीं होगा।

आयोग ने इस मुद्दे पर संदेहों को समाप्त करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियां इस चुनाव में अपने सदस्यों को एक विशेष तरीके से मतदान करने या नहीं करने के लिए व्हिप जारी नहीं कर सकतीं क्योंकि ऐसा करना भारतीय दंड संहिता की धारा 171 सी के अर्थ के तहत अपराध के समान होगा। आयोग ने कहा कि मतदाताओं को इसकी आजादी है कि वे राष्ट्रपति चुनाव में अपनी स्वतंत्र ईच्छा या पसंद से मतदात करें या नहीं करें।

आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल किसी भी उम्मीदवार के लिए प्रचार करने और उसके लिए वोट मांगने और मतदान में हिस्सा न न लेने के लिए अपील करने के लिए स्वतंत्र हैं। आयोग का यह भी कहना है कि निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा मतदान संबंधित सदन से बाहर की चीज है और यह उस सदन की कार्यवाही का हिस नहीं है। राष्ट्रपति पद के लिए 19 जुलाई को मतदान होने वाला और इस चुनाव में संप्रग के प्रणव मुखर्जी और भाजपा तथा कुछ अन्य विपक्षी दलों द्वारा समर्थित पी ए संगमा के बीच सीधा मुकाबला है। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानसभाओं के सदस्य शामिल हैं।

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