खुले बोरवैल की सूचना देने वाले को 500 रुपए का ईनाम

यह निर्णय उपायुक्त पी सी मीणा की अध्यक्षता में बोरवैल को लेकर आयोजित जिला एडवाईजरी कमेटी की बैठक में लिया गया। इस बैठक में गुडग़ांव उत्तरी के एसडीएम डा. सतेन्द्र दूहन, नगराधीश विवेक कालिया, हाईड्रोलॉजिस्ट आर एस सहरावत के अलावा नगर निगम, हुडा, हरियाणा राज्य औद्योगिक संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी), जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी, तहसीलदार तथा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों ने भाग लिया।
मीणा ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने कार्य क्षेत्र में यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बोरवैल खुला ना हो और जो बोरवैल अथवा ट्यूबवैल चालू हालत में हैं वे नियमानुसार होने चाहिएं। उन्होंने कहा कि बोरवैलों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी सभी अधिकारियों की है और इस मामले में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि एचएसआईआईडीसी, नगर निगम, नगर पालिका तथा हुडा विभाग भी अपने-अपने क्षेत्रों में बोरवैलों का सर्वेक्षण करवाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी बोरवैल खुला ना हो। उनके क्षेत्रों में इनफोर्समैंट और बचाव व राहत कार्यों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
उपायुक्त ने कहा कि दुर्घटना होने पर ही नहीं, सामान्य स्थिति में भी बोरवैल खुला मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में बोरवैलों तथा सूखे पड़े ट्यूबवैलों का सर्वेक्षण करवाएं और जहां भी ऐसे अवैध बोरवैल मिलें उनको तत्काल कंक्रीट, मिट्टी आदि से भरकर समतल कर दें तथा दोषी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर की गई कार्रवाई के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारी तथा जिला प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध बोरवैल पाए जाने पर दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की जिम्मेदारी उस अधिकारी की होगी, जिसके क्षेत्र में वह बोरवैल स्थित है।
उन्होंने यह भी कहा कि उच्चत्तम न्यायालय की हिदायतों का पालन किया जाए जिसके तहत सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति के बिना खोदा गया बोरवैल अथवा ट्यूबवैल गैर-कानूनी व अवैध माना जाएगा। इसके अलावा, बोरवैल, रेन वाटर हारवैस्टिंग प्रणाली लगाते समय या किसी भी प्रकार का गड्ढा खोदते समय उच्चत्तम न्यायालय की हिदायत अनुसार उसके चारों तरफ कांटेदार तार तथा साईन बोर्ड अवश्य लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों तथा तहसीलदारों से कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले अपने अधीनस्थ अमले को बोरवैलों के मामले में उच्चत्तम न्यायालय की हिदायतों के बारे में जागृत करें और बताएं कि जिला प्रशासन ने बोर करने वाली एजेंसी व मशीन का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। आने वाली 10 जुलाई के बाद गैर-पंजीकृत बोरिंग मशीन पाए जाने पर वह मशीन तो जब्त की ही जाएगी, मालिक के खिलाफ भी धारा 144 की अवहेलना करने की एफआईआर दर्ज होगी।












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