प्रणब पर हंगामा बाकी, संगमा बनेंगे राष्ट्रपति!

संगमा को राष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है साथ ही इन्हें तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता और नवीन पटनायक ने भी अपना समर्थन दिया है। वहीं जैसा की वन इंडिया ने अपनी प्रकाशित खबर से आपको अवगत कराया था, की राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दलों ने बहुत पहले से अपनी अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं, जिससे अब सभी अपनी-अपनी पसंद के नेता को मैदान में उतार रहे है।
कई दलों ने संगमा का समर्थन किया है तो इस बात से पूर्व लोकसभा स्पीकर भी खासा खुश हैं और उन्होंने अन्य दलों से अपील की है कि वे भी एक आदिवासी को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन दें। एक पत्रकार वार्ता के दौरान संगमा ने कहा था कि, मैं इस बात से बहुत खुश हूं और मैं उन नेताओं का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया था।
इस दौरान उन्होंने अपने आदिवासी फेक्टर को भी कैश कराते हुए कहा था कि मेरे समर्थन से एक बात साफ़ है कि सदन में मौजूद नेतागण हम आदिवासी लोगों की भावनाओं के प्रति प्रतिक्रियाशील हैं। इसलिये भारत के 10 करोड़ आदिवासियों की तरफ से मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। संगमा ने अन्य राजनीतिक दलों से भी अपील की कि इस दिशा में आगे बढ़े और आदिवासी हितों का समर्थन करें।
खैर अगर संगमा के करीब सूत्रों की माने तो संगमा खुद को राष्ट्रपति की कुर्सी पर देखना चाहते हैं और कलाम की नाम वापसी के बाद जिसे सबसे ज्यादा राहत मिली है वो संगमा ही हैं। आपको बता दें की बीते दिन संगमा ने कलाम के साथ लंच किया था, जहाँ उन्होंने कलाम के समक्ष बातों बातों में इच्छा जताई थी की वो राष्ट्रपति बन देश की सेवा करना चाहते हैं।
कलाम कर रहे हैं संगमा का प्रचार
वहीं अगर कलाम से जुड़े सूत्रों की माने तो कलाम ने उन्हें आश्वस्त किया था की वो संगमा का खुल के समर्थन करेंगे। सूत्रों ने ये भी बताया की कलाम अपनी नाम वापसी के बाद लोगों से अनुरोध कर रहे हैं कि वो संगमा को अपना सपोर्ट करें ।
सदन में मौजूद सूत्रों कि माने तो यूपीए और सोनिया गांधी की पसंद प्रणब इस समय राष्ट्रपति पद के सबसे मजबूत दावेदार है। लेकिन उन्हें अन्य दलों द्वारा समर्थन नहीं दिया जा रहा है और यही बात संगमा के लिए प्लस पॉइंट है। भाजपा से जुड़े एक बेहद करीबी सूत्र ने बताया की अभी तो ये महज शुरुआत है आगे प्रणब का जम कर विरोध किया जायगा और हो सकता है पार्टी आलाकमान के फैसले के बाद संगमा को समर्थन दे दिया जाये।
क्या चल रहा है यूपीए में
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि ममता बनर्जी इस समय यूपीए से खफा चल रही हैं, लिहाजा उनके सांसदों और विधायकों का प्रणब को वोट करना मुश्किल लग रहा है। खबरें यहां तक भी आयी हैं कि वो यूपीए छोड़ सकती हैं। यही नहीं ममता के करीबी नेता जो कांग्रेस में हैं, वो भी ममता का साथ देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में यूपीए के अंदर एक बार फिर विरोध की लहरें उठ सकती हैं।
तूफान के पहले छाये सन्नाटे को यूपीए भी अच्छी तरह समझ रही है, इसीलिए कई बड़े नेता ममता को मनाने में जुटी हुई है। इन सभी आंकलनो के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गयी है की संगमा ही देश के अगले राष्ट्रपति हैं।












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