भारतीय राजनीति में तेजी से फैल रहा है परिवारवाद

Indian politics
दिल्‍ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के लोकसभा के लिए चुने जाने के साथ ही राजनीति में वंशवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। डिंपल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के परिवार की छठी सदस्य हैं जो राजनीति में हैं और निर्वाचित पद पर हैं। मुलायम खुद लोकसभा के सदस्य हैं। उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव भी लोकसभा के सदस्य हैं। राम गोपाल यादव राज्यसभा के सदस्य हैं जबकि मुलायम के छोटे भाई उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ मंत्री हैं। लेकिन भारतीय राजनीति में पुत्र और पुत्री तथा बहू अब मुद्दा नहीं रह गए हैं।

देश की सबसे प्रभावशाली नेता व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू हैं। भाजपा नेता मेनका गांधी के साथ भी ऐसा ही मामला है हालांकि वह कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी पार्टी में हैं। दो और गांधी राहुल तथा वरूण लोकसभा के सदस्य हैं। वर्ष 2004 में संसदीय चुनावों के दौरान राहुल को टिकट दिए जाने पर संवाददाताओं ने सोनिया गांधी से सवाल किया था कि क्या वह ऐसा कर परिवार को बढ़ावा नहीं दे रही हैं, इस पर नाराजगी जताते हुए सोनिया ने कहा था, आप मेरी ओर ही क्यों इशारा करते हैं।

इस घटना के आठ साल हो गए हैं और उनका इशारा अन्य दलों और नेताओं के परिवारों की ओर था। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी, द्रमुक नेता एम करूणानिधि के पुत्र एम के स्टालिन और एम के अलागिरि, एनटी रामाराव के दामाद चंद्रबाबू नायडू, पीएमके नेता रामदास के पुत्र अंबुमणि रामदास, राकंापा अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजीत पवार और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के पु़त्र एच डी कुमारस्वामी और एच डी रेवन्ना उस समय भी राजनीति में सक्रिय थे। 2004 के बाद पवार की पुत्री सुप्रिया सूले और करूणानिधि की पुत्री कनिमोई भी राजनीति में आयीं।

सुप्रिया सूले जहां लोकसभा की सदस्य हैं वहीं कनिमोई उच्च सदन में हैं। कांग्रेस के सदस्य पार्टी द्वारा राजनीति में वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोपों को खारिज करते हैं वहीं गांधी-नेहरू परिवार को कांग्रेस का पहला परिवार भी माना जाता है वहीं लोकतांत्रिक जगत के सबसे सफल इस राजनीतिक परिवार ने देश को तीन प्रधानमंत्री दिए हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर अक्सर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। हालांकि वहां भी कई मायनों में ऐसी स्थिति देखी गयी है। क्षेत्रीय दलों में परिवारवाद कुछ ज्यादा ही दिखता है सिवाय मायावती के नेतृत्व वाली बसपा के।

भाजपा में दिवंगत विजयाराजे सिंधिया की दो बेटियां वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे राजनीति में सक्रिय हैं। वसुंधरा के पुत्र दुष्यंत सिंह भी राजनीति में हैं और वह लोकसभा के सदस्य हैं। विजयाराजे सिंधिया के पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में हैं और वह केंद्रीय मंत्री भी हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता प्रेम कुमार धुमल के पुत्र अनुराग ठाकुर भी लोकसभा के सदस्य हैं। विवादों में घिरे भाजपा नेता बी एस येदियुरप्पा के पुत्र बी वाई राघवेंद्र भी राजनीति में सक्रिय हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित लोकसभा के सदस्य हैं वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री के पुत्र भी लोकसभा के सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस आर रेड्डी के पुत्र जगन मोहन इन दिनों अपनी राजनीति से कांग्रेस के लिए मुसीबत पैदा कर रहे हैं। राष्ट्रपति पद के लिए संप्रग उम्मीदवार की होड़ में आगे चल रहे केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के विधायक हैं। महाराष्ट्र में बाल ठाकरे के पुत्र उद्धव और भतीजे राज ठाकरे पहले से राजनीति में सक्रिय थे वहीं अब उद्धव के पुत्र आदित्य भी पार्टी की युवा शाखा में सक्रिय हैं। नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला जहां केंद्र में मंत्री हैं वहीं उनके पुत्र जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं।

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