पाकिस्‍तान हाफिज सईद को दे, भारत देगा एक करोड़ डॉलर

hafiz saeed
नयी दिल्ली। लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और 26/11 के मुख्य षड्यंत्रकर्ता हाफिज सईद के सिर पर एक करोड़ अमेरिकी डालर का ईनाम पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में गृह सचिव आर के सिंह और पत्रकारों के बीच दिलचस्प सवाल जवाब का विषय बन गया। गृह सचिव स्तर की दो दिवसीय वार्ता के बाद एक पाकिस्‍तानी पत्रकार ने सिंह को इस सवाल के जरिये घेरने की कोशिश की क्या भारत सईद को दोषी साबित करने के सबूत देने वाले को अमेरिका द्वारा घोषित एक करोड़ डालर के ईनाम को अपनी जेब से देगा।

गृह सचिव ने इस सवाल के जवाब में बड़ी बेबाकी से कहा कि यदि वे सईद को भारत को सौंप देते हैं तो भारत ऐसा करके अत्यंत प्रसन्न होगा। भारत ने हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ पाकिस्तान को ताजा सबूत मुहैया कराने के साथ ही उसे मुम्बई आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ता सईद के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 24-25 मई को आयोजित दो दिवसीय गृह सचिव स्तरीय वार्ता के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी पक्ष को बताया कि उन्होंने उन्हें सईद के खिलाफ पर्याप्त सबूत मुहैया कराये हैं जो कि सईद के खिलाफ पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की ओर से एकत्रित सबूत में शामिल हो गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने 26 नवम्बर 2008 को हुए मुम्बई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ अतिरिक्त सबूत मुहैया कराने के साथ उन्हें उसके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने बताया कि मुम्बई आतंकवादी हमले के हमलावर अजमल आमिर कसाब के इकबालिया बयान के साथ ही भारत ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली से प्राप्त सबूत मुहैया कराये।

कसाब ने स्पष्ट रूप से जांचकर्ताओं को आतंकवादी हमले में हाफिज सईद की भूमिका के बारे में बताया था। वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के समक्ष वहां आतंकवादी ढांचे की मौजूदगी, हाल में सीमापार से घुसपैठ की पांच कोशिशें, वहां पर सिख आतंकवादियों की मौजूदगी और उस देश से नकली भारतीय नोट के प्रवाह का मुद्दा उठाया।

सूत्रों ने बताया कि यद्यपि पाकिस्तान ने अशांत बलूचिस्तान के साथ कथित भारतीय संबंध को उठाने का प्रयास किया लेकिन गृह सचिव ने इन आरोपों को बकवास करार देते हुए कहा कि भारत का अशांत पाकिस्तानी प्रांत की समस्याओं से कुछ भी लेना देना नहीं है। दोनों पक्षों ने कैदियों पर न्यायिक समिति की ओर से किये गए कार्य की सराहना की और इस बात पर सहमत हुए कि उनका कार्य जारी रहना चाहिए। दोनों पक्ष इसके साथ ही वर्ष 2008 के वाणिज्यिक दूतावास संबंधी समझौते को पूरी तरह से लागू करने की जरुरत पर सहमत हुए।

यह निर्णय किया गया कि सीबीआई और एफआईए जल्द ही एक बैठक तय करके मानव तस्करी, नकली नोट, साइबर अपराध एवं रेड नोटिस जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने की तकनीकी विवरण तय करेंगे। दोनों पक्ष सभी लंबित रेड नोटिसों को शीघ्र निष्पादित किये जाने पर सहमत हुए। पाकिस्तानी पक्ष मुद्दों को जांच पड़ताल करने को सहमत हुआ।

सूत्रों ने बताया कि दिलचस्प बात है कि भारत ने ऐसे वांछित अपराधियों के खिलाफ आठ अनुरोध पत्र जारी किये है जिस पर पाकिस्तानी को अभी कार्रवाई करनी है जबकि भारत को पाकिस्तान की ओर से जारी एक ऐसे अनुरोध पत्र पर प्रतिक्रिया करनी है। दोनों देशों के सचिवों ने दोनों देशों के मछुआरों के अनजाने में एकदूसरे की जलसीमा में जाने के मुद्दे पर विचारों का अदान प्रदान किया। पाकिस्तानी पक्ष ने भारतीय तटरक्ष बल की ओर से पाकिस्तान मैरीटाइम एजेंसी को जून 2012 में दिल्ली में बैठक के लिए दिये गए निमंत्रण पर ध्यान आकृष्ट किया।

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