बजट सत्र में 48 घंटे सिर्फ हंगामा, 11.25 करोड़ बर्बाद

दिल्ली (राजेश केशव)। मंगलवार को बजट सत्र समाप्त हो गया। इस दौरान लोकसभा कुल 181 घंटे चला पर इसमें से 48 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गया।
संसद के इस तरह चलने से सभी खुश हैं। सबसे ज्यादा खुश राज्यसभा सभापति हामिद अंसारी हैं, जिन्होंने बजट सत्र पर संतोष जताते हुए कहा, संसद में अपने अधिकतम क्षमता से काम किया। हालांकि उन्होंने हंगामे पर क्षोभ भी व्यक्त किया। गौरतलब है कि संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के संयुक्त अधिवेशन के साथ 12 मार्च को शुरू हुआ था। यानी कुछ तीन महीना।
हालांकि कुछ समय के लिए बीच में संसद का बजट सत्र नहीं चला। लोकसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने भी बताया कि लोकसभा ने बजट सत्र के दौरान कुछ 181 घंटे काम किया जिसमें से 48 घंटे व्यर्थ चले गए।
कैसे बर्बाद हुए जनता के 11.25 करोड़ रुपए
सबसे पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि संसद पर होने वाला खर्च कोई सांसद नहीं देता, बल्कि ये जनता की जेब से तरह-तरह के टैक्स के रूप में जाता है। यानी संसद पर देश को चलाने के लिए जनता का पैसा लगता है, लेकिन हमारे ही द्वारा चुने गये सांसदों को इसकी फिक्र नहीं। बजट सत्र में बर्बाद हुए 48 घंटे का वित्तीय आंकलन करें तो 25 लाख रुपए के हिसाब से 11.25 करोड़ रुपए पूरी तरह बर्बाद हो गये।
इस 25 लाख में सांसदों के वेतन से लेकर उनकी कैंटीन का खाना, सुरक्षा, पेट्रोल का खर्च आदि से लेकर हर छोटे-बड़े खर्च शामिल हैं। आपको सुनकर हैरत जरूर हुई होगी, लेकिन यह सच है कि संसद में सत्र के दौरान एक घंटे की कार्यवाही पर 25 लाख रुपए का खर्च आता है।
सवा ग्यारह करोड़ की बर्बादी के बाद लोकसभा में इस दौरान कुल 21 सरकारी विधेयक पारित किए गए जिसमें से न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक-2012, भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2012, बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक-2012 शामिल हैं। सूत्र ने बताया कि लोकसभा में नियम 193 के तहत सार्वजनिक महत्व के मामलों पर 14 घंटे और 50 मिनट तक परिचर्चा चली। वहीं राज्यसभा भी करीब 165 घंटे तक चला। इस दौरान यहां भी कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।












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