राष्ट्रपति चुनाव: कांग्रेस नहीं करेगी संगमा का समर्थन

दिल्ली (राजेश केशव)। राष्ट्रपति पद के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए कम से कम एक उम्मीदवार तो मिल ही गया है, क्योंकि आदिवासी कार्ड के नाम पर राष्ट्रपति भवन की सीढियां चढ़ने को आतुर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा ने सभी पार्टियों को एक संदेश तो दे ही दिया है कि जरूरत पड़ी तो वह निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।
मसलन अब संगमा चुनाव तो लड़ेंगे ही भले ही वह हारे या जीते। वैसे उन्होंने अपना कंपेन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वे सभी दलों से मिल रहे हैं पर वे अभी तक कांग्रेस खेमे के किसी भी पदाधिकारी से मिलने में कामयाब नहीं हो सके हैं। वैसे भी सियासी गलियारों में चर्चा है कि संगमा ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने सोनिया गांधी के विदेशी मूल होने का सबसे ज्यादा और मुखर विरोध किया था। इसीलिए सोनिया भी उन्हें भाव नहीं दे रही हैं।
चर्चा तो यहां तक है कि सोनिया के किसी भी करीबी से उनकी मुलाकात तो दूर समय भी नहीं मिल पा रहा है जिससे वह अपनी बातें कह सकें। हालांकि वे विदेशी मूल के मुद्दे को बीते दिनों की बात बताते हैं पर सोनिया गांधी औऱ उनके करीबी अभी तक इस बात को भूल नहीं पाए हैं कि उन्होंने किस तरह से चुनावों में सोनिया का छीछालेदर किया था।
वैसे संगमा को भाजपा से भी काफी उम्मीदें हैं। लेकिन उससे पहले वह भाकपा नेता डी राजा से मुलाकात कर राष्ट्रपति चुनाव के लिये वामदलों का समर्थन मांगा। राजा ने कहा, "संगमा ने मुझसे कहा कि वह कई दलों के नेताओं से मिल रहे हैं। उन्होंने हमारा समर्थन मांगा। बुधवार को वामदलों की बैठक है। देखते हैं क्या होता है।"
वहीं, संगमा अपनी दावेदारी पुष्ट करने में कुछ अन्य नेताओं से भी मिल रहे हैं। वैसे संगमा के लिए बड़ी खबर यह भी है कि कुछ दल अंदर ही अंदर संगमा के लिए लामबंदी कर रहे हैं। जिसमें जयललिता का नाम सबसे आगे हैं। जयललिता ने इस बाबत भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से बात कर एक कदम बढ़ा दिया है। वह सपा, वाम जैसे दूसरे दलों से भी संगमा को समर्थन पर बात करने वाली हैं।
नवीन पटनायक ने संगमा को प्रतिष्ठित जनजातीय नेता करार देकर राष्ट्रपति बनाने की वकालत कर दी है। उड़ीसा में बड़ी जनजातीय जनसंख्या को देखते हुए पटनायक भी इसमें राजनीतिक लाभ देख रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से संगमा पहले ही सभी दलों के नेताओं से मिल चुके हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी की मजबूती बहुत कुछ राजग पर निर्भर होगी। यह और बात है कि फिलहाल राजग में उनके नाम पर सहमति नहीं है। हालांकि राजग का दायरा बढ़ाने को ध्यान में रखते हुए भविष्य में कोई फैसला लिया जा सकता है।
वहीं, ममता ने नया पासा फेंक दिया है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के नाम पर असहज कांग्रेस को थोड़ी राहत दे दी है। एक कार्यक्रम के दौरान ममता ने अपनी ओर से मीरा कुमार, डॉ कलाम और गांधी का नाम उछाल दिया है।












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