बुलंदी के आसमान से गिरीं खजूर के पेड़ पर अटकीं मायावती

अपनी पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि, 'दुबई, रियाद, और आबू धाबी से पांच हजार की कीमत के खजूर के पेड़ को 25000 रूपये के मूल्य पर आयात किया गया। इस तरह विदेश से करीब 37000 पेड़ उत्तर प्रदेश लाये गए। जिनमें 25000 पेड़ों को राजधानी लखनऊ और बाकी बचे हुए पेड़ों को नॉएडा के पार्कों और स्मारकों में लगाया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया की इन पेड़ों की खरीद में राज्य कोष को 55 करोड़ की हानि हुई है। साथ ही इन पेड़ों के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा की वर्तमान समय में इनमें से अधिकांश पेड़ सूख गए है और पूर्वर्ती सरकार द्वारा की गयी ऐसी फिजूलखर्ची की जांच की जायगी।
आपको बताते चलें की आरोप है कि मायावती ने अपने स्मारकों के लिये खजूर के पेड़ मंगवाये थे। लेकिन अधिकांश खजूर के पेड़ सूखे हुये थे।थोड़े हरे पेड़ स्मारकों में लगा दिये जाते थे और जैसे ही वह पेड़ सूखने लगता, उसकी जगह नये खजूर के पेड़ लगा दिये जाते थे। इस तरह खजूर के पेड़ों के सूखने का सिलसिला और एक ही जगह पर दर्जन बार खजूर लगाने की कवायद चलती रही।
इस तरह इस खजूर लगाने के अभियान में करोड़ो रुपये का वारा-न्यारा किया गया। जहां जनता के पैसे की इस तरह हुई लूट पर अब मुख्यमंत्री ने जांच की घोषणा की है। गौरतलब है की बता दें कि इससे पहले मायावती सरकार में बने पार्कों, हाथी की मूर्तियों के निर्माण में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद यूपी पुलिस जांच के लिए एसआईटी का गठन कर चुकी है।












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