चूहे मारने के लिए 650 अफसरों की फौज

प्रदेश के गन्ना व धान उत्पादक इलाकों में चूहों की बहुत अधिक तादाद है। यह चूहे हर साल 10 से 15 प्रतिशत फसल और अनाज की बर्बादी करते हैं। कृषि विभाग द्वारा हर साल दो बार रबी तथा खरीफ फसलों की कटाई के बाद चूहे मारने का अभियान चलाया जाता है। इस बार यह अभियान चले एक पखवाड़ा हो गया है। प्रदेश के 650 सहायक कृषि अधिकारियों (एडीओ) को चूहे मारने के अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए कृषि विभाग ने करीब 10 लाख रुपये की जिंक फास्फाइट नामक दवाई खरीदी है। सहायक कृषि अधिकारी गांवों में जाकर सरपंच, पंच व ग्राम सचिवों को चूहे मारने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे हैं। किसानों को यह दवाई निशुल्क मुहैया कराई जा रही है।
प्रदेश में चूहामार अभियान के फिलहाल अच्छे रिजल्ट बताए जा रहे हैं। कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक श्री दुग्गल के अनुसार अभियान के पहले दिन खेतों में जो बिल खुले हुए होते हैं, उन्हें भरा जाता है। अगले दिन जो बिल फिर खुल जाते हैं, वहां चूहों की मौजूदगी को मानकर आटा, तेल व गुड़ के लेप में जिंक फास्फाइट नामकर दवाई मिलाकर गोलियों के रूप में रख दी जाती है। यह दवाई खाकर चूहे काफी तादाद में मर रहे हैं। अतिरिक्त निदेशक (विस्तार) के अनुसार प्रदेश में चूहा विरोधी अभियान पूरे महीने चलेगा।
अमूमन यह समय इसलिए चुना जाता है, क्योंकि अब इस समय खेत खाली हैं और चूहों के बिलों को आसानी से ढूंढा जा सकता है। उन्होंने बताया कि चूहे गन्ने के खेतों तथा धान की फसल में अधिक पाए जाते हैं। अनाज भंडारण के क्षेत्रों में भी इनकी तादाद बहुत अधिक होती है। अनाज के गोदामों में भी चूहे मारने का यही फार्मूला अमल में लाया जाता है। उन्होंने माना कि यमुना नदी के आसपास के इलाकों में भी चूहों की बहुत अधिक संख्या है। इन पर नियंत्रण के लिए जन सहयोग बेहद जरूरी है।












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