सोशल नेटवर्किंग पर आपत्तिजनक कंटेंट डाला तो खैर नहीं

इस बारे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने केन्द्र सरकार को निर्देश जारी कर दिए है। न्यायालय ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साईट पर जो भी आपत्तिजनक फोटो आदि डाली जा रही हैं उनकी शिकायत कहीं नहीं हो सकती है इस बात को गंभीरता से लेते हुए केन्द्र तीन माह के भीतर एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करें ताकि सब्सक्राइबर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।
अदालत ने कहा कि यह इंटरनेट का युग है इसलिये किसी भी सोशल नेटवर्किंग साईट के लिये शिकायत अधिकारी का होना जरुरी है। अदालत ने कहा कि सूचना तकनीक कानून की धारा 11 के तहत सोशल नेटवर्किंग साईट के शिकायत अधिकारी की व्यवस्था है। यदि यह कानून में शामिल है तो इसका पालन किया जाना चाहिये।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति सईद-उज जमा सिद्दीकी की खंडपीठ ने भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर की याचिका पर यह आदेश पारित किया। केन्द्र सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक निगम ने यह कह कर याचिका का विरोध किया कि इसमें सोशल नेट वॄकग साईट गुगल और याहू को प्रतिवादी नहीं बनाया गया है।
खंडपीठ केन्द्र सरकार के वकील से सहमत नहीं थी और उसका कहना था कि यह केन्द्र सरकार का दायित्व है कि वह कानून और नियमों का पालन कराये। खंडपीठ ने केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सचिव को दिये आदेश में कहा कि सोशल नेटवर्किंग साईट के शिकायत अधिकारी के नाम और पते की जानकारी तीन माह में कराना सुनिश्चित कराया जाय।
याचिका में कहा गया कि केन्द्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी सचिव को इस मामले में कई बार पत्र लिखे गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूचना तकनीक कानून 2000 की धारा 71 के अनुसार प्रभावित व्यक्ति यदि कोई शिकायत करता है तो 36 घंटे में जवाब देने और उसका निराकरण का प्रावधान है। याचिका के अनुसार गुगल, याहू, फेसबुक और माई स्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग साईट ऐसा नहीं करते हैं।












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