मुलायम से खफ़ा हुए यूपी के शिया मुसलमान

समाजवादी पार्टी से सैयद अहमद बुखारी की नाराज़गी अभी खत्म नहीं हुई थी अब उत्तर प्रदेश के शिया मुसलमान मुलायम सिंह यादव से खफा हो गये हैं। शिया धर्म गुरु डा. मौलाना कल्बे सादिक ने मुलायम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सवालों के कई तीर एक साथ चला दिये हैं। हालांकि वे पिछले कई दिनों से उनसे नाराज़ चल रहे थे। कारण यह कि मुलायम ने सत्ता में शियों का प्रतिनिधित्व नहीं रखा।
डा. सादिक ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से पत्र लिखकर कहा है कि वो इस सवाल का जवाब दें कि अब तक सत्ता में शिया समुदाय को भागीदारी क्यों नहीं दी गयी है। मौलाना ने सपा सुप्रीमो से जल्द से जल्द इस सवाल का जवाब देने को कहा है ताकि वह मुलायम के जवाब से शिया मुसलमानों को अवगत करा सकें।
इस संबंध में डा.सादिक ने सपा मुखिया को भेजे पत्र में कहा है कि,"इतिहास साक्षी है कि स्वतंत्रता के बाद से भारत के मुसलमानों ने अपना सियासी नेता व राजनेता हिन्दुओं को ही चुना है। इस मामले में महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, हेमवती नन्दन बहुगुणा और स्वयं आपका नाम उल्लेखनीय है।
शिया धर्म गुरु ने पूछा, "विधानसभा चुनाव में मुसलमानों के हर वर्ग ने किसी भी व्यक्ति के दिशा-निर्देश या अपील से प्रभावित हुए बगैर समाजवादी पार्टी को भरपूर सहयोग देकर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से उसकी सरकार बनावायी। चुनाव के बाद आपने अपने सुपुत्र अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया जिसको सभी मुसलमानों ने हाथों-हाथ लिया। उनके मुख्यमंत्री बनने से मुसलमानों में खुशी की लहर पैदा होने के साथ उनकी उम्मीदें भी परवान चढ़ती गयीं लेकिन अब मैं असमंजस की स्थिति में हूं।"
डा. सादिक ने कहा कि विडम्बना यह है कि मुसलमानों के अन्य वर्गों के साथ-साथ शिया समुदाय के लोग जिनमें सपा के कार्यकर्ता भी शामिल हैं मुझसे पूछ रहे हैं कि जब सभी मुसलमानों ने सपा को लगभग शतप्रतिशत वोट दिया है तो मंत्रिमण्डल तथा विधान परिषद व राज्यसभा के चुनाव में मुसलमानों के अन्य वर्गों के साथ-साथ शिया मुसलमानों को पूर्णतया क्यों वंचित रखा गया? शिया मुसलमानों के इस सवाल का मैं क्या उत्तर दूं? उचित होगा कि आप ही उनके द्वारा उठाये गये सवालों के जवाब से हमें अवगत करा दें ताकि मैं शिया मुसलमानों को उचित जवाब दे सकूं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश कि राजधानी लखनऊ में शिया मुसलमानों कि तादाद तकरीबन 36 लाख है जो किसी भी पार्टी को जिताने या हराने के लिए काफी है साथ ही अगर हम इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों कि बात करें तो जौनपुर, इलाहाबाद, मुरादाबाद, हरदोई, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़ समेत कई अन्य जिलों में शिया मुसलमान एक अच्छी तादाद में रहते है।
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