पुलिस की धमकी, माओवादियों की रिहाई पर होगी हड़ताल

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भुवनेश्वर। दोहरे बंधक संकट से जूझ रही ओडिशा सरकार ने आज दो माओवादी समूहों को सलाह दी कि उन्होंने जिन कैदियों की शीघ्र रिहाई की मांग की है, उनके लिए जमानत अनुरोध दायर करें। लेकिन साथ ही पुलिस बल ने किसी भी कट्टर माओवादी की रिहाई पर नक्सल विरोधी अभियान का बहिष्कार करने की सरकार को धमकी दी है।

सरकार के समक्ष दोहरी समस्या खड़ी हो गयी क्योंकि ओडिशा पुलिस एसोसिएशन और ओडिशा कांस्टेबल, हवलदार और सिपाही महासंघ ने चेतावनी दी है कि चेंदा भूषणम उर्फ घासी जैसे कट्टर माओवादियों की रिहा करने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करने के साथ ही वे नक्सली क्षेत्र में ड्यूटी से हट जायेंगे।

घासी कम से कम 55 सुरक्षाकर्मी की हत्या के मामले आरोपी है। यह चेतावनी ऐसे समय में आयी है जब विधायक झीना हिकाका और इतालवी नागरिक पाओलो बोसुस्को के अपहर्ताओं ने नयी मांगें रख दी हैं।

अपहर्ताओं ने विधायक को छोड़ने के बदले 30 कैदियों को रिहा करने की मांग की है। उनकी इस मांग के एक दिन बाद गृहसचिव यू एन बेहरा ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार विधायक को मुक्त किये जाने के बदले 23 लोगों की रिहाई में सहयोग के लिए तैयार है जिनमें चासी मुलिया आदिवासी संघ (सीएमएएस) के 15 सदस्य हैं।

बेहरा ने सोमवार रात कहा कि चूंकि जेल से उनकी रिहाई में संबंधित अधिकारी से जमानत मंजूर करने की न्यायिक प्रक्रिया शामिल है, अतएव कैदियों को अपने जमानत आवेदन दायर करने चाहिए। बेहरा ने बोसुस्को की रिहाई के लिए माओवादियों के मध्यस्थों के साथ बातचीत में तीन सदस्यीय सरकारी दल का प्रतिनिधित्व किया था।

माओवादियों के इस सुझाव पर कि विधायक की पत्नी को अपने पति को लाने के लिए सीएमएएस और भाकपा माओवादियों के कैदियों को साथ लेकर कोरापुट जिले के बालीपेटा गांव जाना चाहिए, बेहरा ने कहा कि यह सलाह दी जाती है कि 23 कैदियों की ओर से जमानत अर्जी दायर की जाए। इतालवी नागरिक को मुक्त किये जाने के लिए जिन लोगों को रिहा किया जाना है उनके सिलसिले में भी जमानत याचिकाएं दायर की जा सकती है।

गृहसचिव ने कहा कि हम आशा करते हैं कि अपहर्ता दोनों बंधकों को शीघ्र ही बिना कोई नुकसान पहुंचाए और बेहतर स्थिति में रिहा कर देंगे। बोसुस्को के अपहर्ताओं द्वारा सरकार से यह स्पष्ट करने मांग कि वह कितने माओवादियों को छोड़ेगी, उन्होंने कहा कि ऐसा जान पड़ता है कि सरकार के प्रतिनिधियों और माओवादी मध्यस्थों के बीच हुए समझौते के बयान की सामग्री माओवादी ओडिशा राज्य संगठन समिति के सचिव सव्यसाची पांडा तक नहीं पहुंची है।

उन्होंने कहा कि माओवादियों के नामित मध्यस्थों- बी डी शर्मा और दंडपाणि मोहंती से कहा गया है कि संयुक्त बयान की एक प्रति पांडा को भेजे ताकि उसका जो भी भ्रम हो दूर हो और पाओलो बोसुस्को को रिहा किया जाए। संबंधित दोनों माओवादी समूहों द्वारा तय समयसीमा कल समाप्त हो रही है।

ऐसे में सरकार ने पुलिस से भूषणम समेत कट्टर माओवादियों को छोड़ने पर पुलिस से राय मांगी है। ओपीए के अध्यक्ष स्वरमल शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि हम कट्टर माओवादियों को छोड़ने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो हम उनकी रिहाई रोकने के लिए सघन आंदोलन भी छेड़ेगे।

शर्मा ने कहा कि यदि स्थिति ऐसी पैदा हुई तो पुलिसकर्मी माओवादी विरोधी अभियान से हटने के लिए बाध्य हो जाएंगे और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि कट्टर माओवादियों को रिहा किया जाता है तो पुलिस का बलिदान व्यर्थ जाएगा। ऐसी ही चेतावनी भेजते हुए ओडिशा कांस्टेबल, हवलदार एवं सिपाही महासंघ ने कहा कि यदि कट्टर माओवादी छोड़े जाते हैं तो पुलिसकर्मी माओवादी विरोधी अभियान का बहिष्कार करेंगे।

राज्य सरकार माओवादियों की रिहाई पर विभिन्न विकल्पों का आकलन कर रही है। मुख्य सचिव बी के पटनायक ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमने पुलिस से राय मांगी है कि क्या विधायक के अपहर्ताओं की ताजा मांगें पूरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कोई भी फैसला करने से पहले कानूनी पहलू का सत्यापन करने की जरूरत है।

कल रात मीडिया में जारी एक पत्र में माओवादियों की आंध्र ओडिशा सीमा विशेष क्षेत्रीय समिति ने न सिर्फ ज्यादा संख्या में कैदियों की रिहाई की मांग की बल्कि विधायक की रिहाई के लिए रिहा किए जाने वाले कैदियों की शारीरिक तौर पर मौजूदगी की भी मांग रखी। माओवादियों की मांग है कि हिकाका की पत्नी कौशल्या कल नक्सल प्रभावित नारायणपटना के बालीपेटा इलाके में रिहा किए गए 30 माओवादियों के साथ आएं। इन 30 माओवादियों में 23 लोग ऐसे भी होंगे जिनकी रिहाई के बारे में ओडिशा सरकार ने फैसला किया था।

माओवादियों से अपने पति को तत्काल बिना नुकसान पहुंचाए रिहा करने की मांग करते हुए विधायक की पत्नी ने कहा कि उनके पति निर्दोष हैं। माओवादियों के इस सुझाव पर उनहें मुक्त किए गए कैदियों और अन्य के साथ बालीपेटा पहुंचना चाहिए, उन्होंने कहा कि इस मामले में नक्सलियों और सरकार के बीच चर्चा होनी चाहिए।

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