29 रूपये में खर्च चलाने वाले कहलाएंगे अमीर

गरीबी रेखा के नये फार्मूले के अनुसार शहरों में महीने में 859.60 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 672.80 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। इससे भी बढ़कर बात यह है कि योजना आयोग ने अब गरीबी रेखा सीमा को उच्चतम न्यायालय में सौंपी गई रेखा से भी नीचे रखा है।
योजना आयोग ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय में सौंपे शपथपत्र में कहा था जून 2011 के मूल्य स्तर के लिहाज से शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा को अनंतिम तौर पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 965 रुपये (32 रुपये प्रतिदिन) और ग्रामीण क्षेत्रों में 781 रुपये प्रतिमाह यानी 26 रुपये प्रतिदिन रखा जा सकता है। गरीबी रेखा को लेकर आयोग द्वारा दिये गये इस अनुमान पर तब नागरिक समाज में काफी विरोध हुआ था।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयोग द्वारा दी गई गरीबी की इस परिभाषा पर सवाल खड़ा किया। आयोग के आज जारी अनुमान के अनुसार वर्ष 2009-10 में देश में गरीबों की संख्या घटकर 34.47 करोड़ रह गई है जो कि वर्ष 2004-05 में 40 करोड़ 72 लाख पर थी। वर्ष 2004-05 का गरीबी का अनुमान विवादास्पद रही तैंदुलकर समिति की कार्यप्रणाली के अनुसार लगाया गया था। समिति की प्रणाली के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक कैलारी उपभोग पर आने वाले खर्च से गरीबी रेखा का निर्धारण किया गया।
योजना आयोग का गरीबी का अनुमान तेंदुलकर समिति द्वारा सुझाई गई पद्धिति पर आधारित है जिसमें भोजन में कैलोरी की मात्रा के अलावा परिवारों द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया जाने वाले खर्च भी गौर किया गया है।












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