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'सरकार ने गरीबी नहीं, भूखमरी की रेखा तय की'

malnutrition
नयी दिल्ली। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे लोगों की संख्या में कमी के सरकार और योजना आयोग के दावों को गलत बताते हुए भाजपा ने आज आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने दैनिक आय स्तर के मानदंड को कम कर दिया है और ऐसा लगता है कि वह गरीबी की नहीं भुखमरी की रेखा तय कर रही है।

राज्यसभा में भाजपा के उपनेता एसएस अहलूवालिया ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी ने बीपीएल के मानदंड को लेकर योजना आयोग द्वारा उच्चतम न्यायालय में जमा की गयी रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार हमें बताए कि कोई व्यक्ति शहरों में 32 रुपये प्रतिदिन और गांवों में 26 रुपये प्रतिदिन पर कैसे रह सकता है।

अब उन्होंने इस मानदंड को और कम कर दिया है। योजना आयोग ने कल जो आंकड़े जारी किये वे दिखाते हैं कि 2004-05 से 2009-10 के बीच गरीबी में कमी आई है, हालांकि गरीबों को परिभाषित करने के लिए आय का मानदंड 32 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 29 रुपये कर दिया गया है।

अहलूवालिया ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वे कौन सी रेखा खींच रहे हैं। यह भुखमरी की रेखा है या गरीबी रेखा है। यह बात प्रधानमंत्री और योजना आयोग की कल्पना से भी परे हैं कि कोई व्यक्ति इतनी कम आय में जीवनयापन कैसे कर सकता है। भाजपा का कहना है कि किसी व्यक्ति के लिए सम्मान के साथ जीने व भोजन, कपड़ा, चिकित्सा सुविधाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए 29 रुपये की राशि बहुत कम है।

उन्होंने कहा कि देश में कुपोषण से बच्चे मर रहे हैं। अर्जुन सेनगुप्ता समिति ने कहा था कि देश में 80 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे रहती है। मुझे नहीं पता कि सरकार यह आंकड़ा कहां से प्राप्त कर रही है। ऐसा लगता है कि गरीबी की रेखा को भुखमरी की रेखा बनाया जा रहा है।

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