रेल गाड़ी की छुक-छुक में ..आम आदमी की धक-धक है

उन्होंने कहा कि .. रेल गाड़ी की छुक-छुक में ..आम आदमी की धक-धक है...रेलगाड़ी की बरकत में ही देश की बरकत है। यही नहीं रेल बजट पेश करते हुए भी दिनेश त्रिवेदी ने बीच-बीच में कविताओं का सहारा लिया। रेलवे की सुरक्षा की बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि कंधा मिलाकर साथ चलें तो कुछ नहीं मुश्किल, साथ मिलकर अगर हम पटरियां बिछायेंगे तो देखते ही देखते सब रास्ते खुल जायेंगे।
यही नहीं सुरक्षा मानकों के लिए एक विशेष संगठन की स्थापना के ऐलान के बाद दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि .. कंधे झुक गये हैं, कमर लचक गई है, बोझा उठा-उठाकर बेचारी रेल थक गई है। रेलगाड़ी को नई दवा चाहिये, नया असर चाहिये, थोड़े पैसे चाहिये, इस सफर में आप जैसा हमसफर चाहिये।
अब रेलवे की आर्थिक स्थिति बहुत खराब होती जा रही है। इसलिए अब रेलवे मांगे पैसा। ताकि उसका भला हो। दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि आधुनिकीकरण के लिए 5.60 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में रेलगाड़ियों पर 1.7 लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा।












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