सोनिया गांधी ने रावत की जगह जोशी को क्यों चुना?

लेकिन कुर्सी मिल गयी विजय बहुगुणा जोशी को। यह जानते हुए कि यह फैसला उत्तराखंड कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं होगा वो भी उस समय में जब कांग्रेस अपने दम पर नहीं बल्कि समर्थकों के दम पर सरकार बनाने जा रही हैं। राजनैतिक पंडितो के मुताबिक निम्नलिखित कारणों से सोनिया ने बहुगुणा जोशी को सत्ता सौंपी है।
कारण नंबर 1: जोशी परिवार लंबे अरसे से गांधी परिवार के करीब रहा है। गांधी परिवार को जोशियों पर काफी भरोसा है। जो सोनिया गांधी को निर्णय लेने में मदद कर गया।
कारण नंबर 2: सबको पता है कि 13 जिलों वाले प्रदेश में भी गढ़वाल और कुंमाऊ का झगड़ा है। ऐसे में इस बार गढ़वाल, कुमांऊ पर भारी पड़ा। इस बार गढ़वाल से 19 और कुमांऊ से 13 विधायक जीतकर आए हैं। गढ़वाल के ही एक और नाम हरक सिंह रावत पर पार्टी के अधिकांश लोगों में सहमति नहीं बन पा रही थी। ऊपर से हरक सिंह रावत और हरीश रावत के बीच की तल्खी जगजाहिर है। ऐसे में दोनों में से किसी को चुनना गढ़वाल में मतभेद पैदा कर सकता था इसलिए सोनिया ने दोनों ही विकल्पों को हटाकर विजय बहुगणा जोशी पर मोहर लगा दी।
कारण नंबर 3: तीसरा सबसे अहम कारण रहा विजय बहुगुणा की बेदाग, सम्मानित और ईमानदार छवि। लोग उनका सम्मान करते हैं। उनकी बातों को सुनते और समझते हैं। ऊपर से उनकी शालिनता,हरीश रावत और हरक सिंह रावत के आक्रोश पर बीस पड़ी। विजय बहुगुणा का कमोबेश लो प्रोफाइल रहना भी उनके पक्ष में गया जिसके चलते यूपीए सुप्रीमो सोनिया गांधी ने उन पर भरोसा जताया।
कारण नंबर 4: कहते हैं ना कि दो बिल्लियों की लड़ाई में बंदर रोटी खा जाता है। तो ऐसा ही कुछ उत्तराखंड में भी हुआ जहां हरीश रावत और हरक सिंह रावत एक दूसरे के खिलाफ लगभग बगावत पर उतारू हो आए जिससे फायदा विजय बहुगुणा जोशी का हो गया।












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