सरकार ने कानून को भी खरीद लिया: बाबा रामदेव
संविधान और कानून को कमतर किया गया और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे लोगों पर जबरन कार्रवाई कर मानवाधिकरों का उल्लंघन किया गया। दिल्ली पुलिस ने उनसे आकर कहा ही नहीं कि आप गिरफ्तारी दे दीजिये।
उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी बस वो आकर लाठियां बरसाने लगीं। उन्होंने एक बार फिर से रामलीला मैदान के लिए गृहमंत्रालय पर निशाना साधा। उन्होंने दोहराया कि जो कुछ भी हुआ सब कुछ चिदंबरम के इशारे पर हुआ वरना दिल्ली पुलिस की इतनी औकात नहीं कि वो रात में आकर लोगों पर लाठियां बरसाती।
कहना गलत ना होगा कि भ्रष्ट सरकार ने कानून को भी खरीद लिया है। अगर वो वहां से भागते नहीं तो सरकार उनकी वहीं पर हत्या करवा देती। लेकिन उन्होंने साफ किया कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना नहीं कर रहे हैं बल्कि यह फैसला उनकी जीत का सबब है। इस प्रेस वार्ता में बाबा रामदेव के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता रामजेठमलानी भी मौजूद थे।
बाबा रामदेव ने साफ किया कि वो अब भी पीछे हटने वाले नहीं हैं, वो काले धन के खिलाफ अपना अभियान चालू रखेंगे। सरकार के ही कुछ लोग काले धन के मामले में लिप्त हैं इसलिए सरकार काले धन का ब्यौरा सरकार आम जनता को नहीं दे रही है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश बी एस चौहान और स्वतंत्र कुमार की बेंच गुरूवार को रामलीला मैदान में हुए लाठीचार्ज को गलत करार दिया है।
पीठ ने उन पुलिस अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है जिन्होंने लाठी चार्ज किया था। सु्प्रीम कोर्ट के फैसले में गृहमंत्रालय पर कोई टिप्पणी नहीं की गयी है। कोर्ट का कहना है वो यह नहीं पता लगा पाये कि यह सबकुछ किसके इशारे पर किया गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस के सभी लोग उग्र नहीं थे केवल कुछ लोग ही उग्र थे जिन्होंने लाटीचार्ज की घटना को अंजाम दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस घटना के दौरान योग गुरू बाबा रामदेव की शिष्या राजबाला की मृत्यु हुई है जिसके लिए उसके परिवार वालों को 5 लाख का मुआवजा देना पड़ेगा। लेकिन इस ऱाशि का 25 प्रतिशत बाबा रामदेव अदा करेंगे और 75 प्रतिशत दिल्ली पुलिस अदा करेगी।
कोर्ट ने उन लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज करने को कहा है जिन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके थे। साथ ही गंभीर रूप से घायलों को पचास हजार रूपए दिए जाएंगे। साथ ही मामूली रूप से घायलों को पच्चीस हजार रूपए का मुआवजा दिया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि बाबा अगर चाहते तो शांति से मैदान खाली कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए वो भी दोषी हैं।













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