बदलते राजनीतिक परिदृश्य में सपा 'युवा' के भरोसे

लखनऊ। बदलते राजनीतिक परिदृश्य में युवा जोश राजनीति में ऊफान पर है इससे जहां कोई दल अछूता नहीं है वहीं समाजवादी पार्टी भी इस मजबूत वोट बैंक को अपनी ओर करने में जुटी है। यही कारण है कि मुस्लिमों की राजनीति करने वाली सपा इस चुनाव में युवाओं को अधिक तहरीज दे रही हैं। हालांकि सपा ने चुनाव में 13 प्रतिशत से अधिक युवाओं को टिकट नहीं दिया है।

पिछले चुनावों से लगातार सपा का जनाधार गिरता गया। लोकसभा चुनाव में मुस्लिम विरोधी कल्याण सिंह से नजदीकियां सपा को इतनी भारी पड़ गयी कि कल्याण सिंह से नाता तोडऩे के बाद भी मुस्लिमों की नाराजगी नहीं दूर नही हो सकी। सपा प्रमुख मुलामय सिंह यादव ने सार्वजनिक तौर पर मुस्लिमों से माफी भी मांगी, पर उपचुनावों में मिली हार ने यह साबित कर दिया कि मुस्लिमों ने मुलायम को माफ नहीं किया।

सपा सूत्रों की मानें तो लोकसभा व उपचुनावों के सपा विरोधी परिणामों से सबक लेते हुए मुलायम ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां काफी पहले ही शुरू कर दी थी। कांग्रेस युवराज के यूपी में बढ़ते दखल के बाद मुलायम सिंह ने भी पुत्र अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर थमा दी। राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा को इस बात का एहसास हो चला है कि अब सिर्फ मुस्लिमों के सहारे चुनावी नैय्या पार नहीं लग सकती। इसी को ध्यान में रखते हुए सपा ने युवाओं वोट बैंक को अपनी ओर खींचने का भी प्रयास शुरू कर दिया।

चाहे प्रत्याशी चयन को या पार्टी का अन्य कोई महत्वपूर्ण निर्णय अखिलेश यादव के बढ़ते दखल ने यह साबित कर दिया कि सपा ने अब अपनी सोच बदली है। हालांकि मुस्लिमों को मनाने का प्रयास करते हुए आजम खां की वापसी पार्टी में की गयी लेकिन कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण का पासा फेंककर सपा के वोट बैंक पर सेंध लगाने का प्रयास किया। यही कारण है कि सपा ने मुस्लिमों के साथ युवा वोट बैंक पर भी हाथ आजमाने की कोशिश की है। सपा ने भले ही 13 प्रतिशत से अधिक युवाओं को प्रत्याशी न बनाया हो लेकिन घोषणापत्र में युवाओं से तमाम लुभावने वादे किये हैं।


बेरोजगारी भत्ता के साथ ही लैपटाप आदि देने के वायदा दिया है। कहना गलत नहीं होगा कि हर दल ने अपने चुनाव घोषणापत्र में युवाओं को एक अलग वर्ग के तौर पर माना है। राजनीतिक पार्टियों की नजर में युवाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के मुद्दे सबसे अहम हैं और वे जाति तथा धर्म के आधार पर वोट नहीं देंगे। यह वजह है कि कभी अंग्रेजी और क प्यूटर शिक्षा का मुखर विरोध करने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की पार्टी ने इस बार सबको चौंकाते हुए अपने घोषणापत्र में छात्रों को लैपटाप देने का वादा कर डाला।

सपा ने मुसलमान विद्यार्थियों और आधुनिक शिक्षा के प्रति उनकी जरूरतों पर ध्यान देते हुए अपने घोषणापत्र में मदरसों में तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था करने, 10वीं कक्षा पास करने वाली मुस्लिम लड़कियों को आर्थिक मदद तथा उनकी शादी के लिए 30 हजार रुपए देने का वादा किया है। वहीं अन्य दलों ने भी युवाओं को टिकट देकर युवा वोट बैंक पर जोर-आजमााइश शुरू कर दी है। भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में भी युवाओं पर वादों की बारिश की गई है।

इस दल ने पांच साल में एक करोड़ रोजगार सृजित करने, युवा बेरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना के तहत युवाओं को सस्ती ब्याज दर पर एक लाख रुपए तक का कर्ज देने और पात्र युवाओं को दो हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया है। कांग्रेस ने भी युवाओं को मजबूत वोट बैंक मानकर उस पर खास निगाह रखी है। यही वजह है कि उसने राज्य से प्रतिपलायन रोकने के लिए अगले पांच साल में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का एलान किया है। युवा वोट बैंक की इस खींचतान में सपा को कितना फायदा मिलेगा यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेंगे लेकिन चौदहवीं विधानसभा चुनाव युवाओं का कद जरूर बढ़ गया है।

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