माता-पिता रजामंद तो ही व्यस्क बच्चे रहेंगे संग

अपने फैसले में जस्टिस जेएच भाटिया ने बताया कि माता-पिता की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने नाबालिग बच्चों की देखभाल करे। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो वे अपने माता-पिता की निजी संपत्ति में तभी रह सकते हैं जब उनके माता-पिता इसकी उन्हें रजामंदी दें।
कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि लड़की की शादी के बाद वह अपने पति के जीवन का हिस्सा बन जाती है। कानून के आधार पर शादी के बाद जब बेटी अपने मायके जाती है तो वह एक मेहमान की तरह होती है। जब तक उसके माता-पिता उसे वहां रहने की इजाजत देते हैं तब तक ही वह वहां रह सकती है। वहां रहने के लिए लड़की अपने माता-पिता पर दबाव नहीं बना सकती।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि लड़की को तब तक वहां रहने का अधिकार जब तक उसका पिता जिंदा है। उसकी मौत के बाद ही बेटा का उस मकान पर अधिकार बनता है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पिता या मां की मौत के बाद प्रॉपर्टी पर पहला हक उसके बेटे का होता है।












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