3 महीने में देनी होगी लोकसेवकों पर कार्रवाई की इजाजत: सुप्रीम कोर्ट

Janata Party president Subramanian Swamy
दिल्ली (ब्यूरो)। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी को सुप्रीम कोर्ट से इस बात का उत्तर मिल गया है जिसमें उन्होंने कोर्ट से पूछा था कि लोकसेवकों पर कार्रवाई की इजाजत के लिए कितनी समय सीमा होनी चाहिए। जस्टिस गांगुली की पीठ ने कहा, इसके लिए तीन महीने का समय पर्याप्त है वैसे विशेष परिस्थितयों में यह चार महीने हो सकता है। यदि उसके बाद भी इजाजत नहीं मिलती तो इसे स्वयं इजाजत मान लेना चाहिए। वैसे कोर्ट ने कहा कि इसके लिए एक गाइडलाइंस बनाने की जरूरत है। हालांकि कोर्ट ने भ्रष्‍टाचार निरोधक कानून की धारा 10 में बदलाव पर भी जोर दिया औऱ कहा कि देश की संसद यह तय करे कि लोकसेवकों के खिलाफ केस की इजाजत के लिए क्‍या समयसीमा होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार संवैधानिक अधिकार है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पीएमओ के खिलाफ स्‍वामी की याचिका कबूल कर ली है। कोर्ट ने कहा कि देश का कोई भी नागरिक अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है और भ्रष्‍टाचार के मामले की जांच के लिए गुहार लगा सकता है। स्‍वामी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने आश्वस्त कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में विजय मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली हाई कोर्ट के उस फैसले को भी दरकिनार कर दिया जिसके तहत 2जी घोटाले में आरोपी और पूर्व मंत्री ए राजा के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी पर फैसला लेने के लिए पीएम को निर्देश देने से इंकार किया गया था।

भड़काऊ लेख में मिली स्वामी को जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुंबई के एक दैनिक में भड़काऊ लेख लिखने के आरोपी जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी को सोमवार को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एम एल मेहता ने भविष्य में ऐसे लेख नहीं लिखने संबंधी सुब्रह्मण्यम का हलफनामा रिकार्ड करते हुए कहा कि गिरफ्तारी की सूरत में 25000 रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि की जमानत पर उन्हें छोड़ा जा सकता है।

अदालत ने कहा कि किसी पुस्तक के आधार पर कोई लेख लिखना हालांकि किसी नागरिक का मौलिक अधिकार है लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल चुनिंदा तर्कसंगत प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने उपर लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करने के बारे में स्वामी द्वारा दिए गए हलफनामे की भी प्रशंसा की। न्यायमूर्ति मेहता ने स्वामी की जमानत याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आप काफी बुद्धिमान व्यक्ति हैं। आप जो चाहे लिख सकते हैं लेकिन जिम्मेदाराना प्रतिबंधों का पालन करें।

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