दिल्ली: दुश्मनी में मां समेत तीन बेटियों की हत्या

इसलिए उसने शहीदनगर छोड़ा था। रात करीब 11 बजे पांच हमलावर उसके घर में घुस आए और उसकी पत्नी के साथ तीन बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी। नवाब घर आया तो हमलावरों ने उसे भी घायल कर दिया। वह भागकर जीजा वसीम के घर पहुंचा और बेहोश हो गया। नवाब के भाई मुश्ताक ने हत्याकांड की रिपोर्ट सिराज, उसके बेटे नईम, नदीम भाई कल्लू एवं उसके पुत्र पाली के खिलाफ दर्ज कराई है। यह महज 200 रुपये का पचड़ा था। बस इतने से पैसों के चक्कर में पहले आरिफ मारा गया था। अब आरिफ के हत्यारोपी नवाब का पूरा कुनबा खत्म हो गया है।
बदले की आग में दहकते दुश्मनों ने न सिर्फ नवाब की बीवी-बच्चों का कत्ल किया, बल्कि उसे भी मौत के मुहाने पर पहुंचा दिया। जेल से छूटा यह ऑटो ड्राइवर अब अस्पताल में मौत से जूझ रहा है मगर उसकी जान को खतरा वहां भी है। 13 अगस्त 2011, दिन शुक्रवार। सिर्फ 200 रुपये के लिए शहीदनगर में कबाड़ कारोबारी सिराज अहमद के बेटे आरिफ उर्फ आसिफ की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, हमेशा साथ रहने वाले आरिफ और सोनू में झगड़ा हुआ था। मारपीट हुई तो सोनू के घरवाले भी कूद पड़े।
पिटाई से आरिफ इतना घायल हो गया कि अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में सोनू के साथ उसके भाई नवाब, मुश्ताक, बबलू के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। साहिबाबाद पुलिस ने 21 अगस्त को चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। उनके जेल में रहने के दौरान 10 सितंबर को चार्जशीट भी लगा दी थी। नवाब एक माह पहले ही जमानत पर छूटा था। आरिफ के परिवार से उसे खतरे का आभास था और यही नसीहत उसे पुलिस ने भी दी थी। इसी वजह से वह शहीदनगर छोड़कर पत्नी-बच्चों के साथ लोनी में रहने चला गया था।
एसएसपी के पीआरओ राजेश द्विवेदी ने बताया कि सिराज ने अपने बेटे की हत्या का बदला नवाब के परिवार को ठिकाने लगाकर लिया। वह नवाब को भी मारना चाहता था मगर सौभाग्य से वह बच गया। नवाब के पत्नी और बच्चों की हत्या की मनहूस खबर अलसुबह जैसे ही शहीदनगर पहुंची तो यहां के लोग गुस्से में आ गए। गुस्साई भीड़ सड़कों पर उतर आई और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शहीद नगर चौकी घेर ली। कुछ देर बाद भीड़ ने दिल्ली-सीमापुरी बार्डर पर जाम भी लगा दिया।
जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर लोगों को शांत किया और जाम खुलवाया। शहीद नगर इलाके में पूर दिन मातम का माहौल रहा और सन्नाटा पसरा रहा। नवाब की पत्नी और बेटियों की हत्या से शहीदनगर में उसके घर चीत्कारों का सैलाब आ गया है। नवाब के पिता नत्थी और बहन शबाना सुध-बुध खो बैठे हैं। शबाना बार-बार कातिलों को बद्दुआ दे रही है। रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग सांत्वना दे रहे हैं मगर गम ऐसा कि कोई सांत्वना काम नहीं आ रही। नवाब के मासूम बेटे फरमान तीन दिन पहले ही दादा के पास शहीदनगर आ गया था।
घटना के समय यदि वह भी लोनी में होता तो कातिल उसे भी नहीं छोड़ते। शहीदनगर में होने की वजह से उसकी जान बच गई। नवाब की बहन शबाना रो-रोकर कह रही है कि भाई-भाभी भी अगर यहां रहते तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। अब फरमान की हिफाजत और परवरिश ही जिंदगी का मकसद बचा है। बता दें कि कुछ दिन पहले नवाब और मुश्ताक लोनी से शहीद नगर आए थे। तब सिराज ने पुलिस से जान के खतरे की शिकायत की थी। उस समय साहिबाबाद पुलिस ने नवाब के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की थी।












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