बाबरी विध्वंस का न तो अफसोस था, न है और न रहेगा: कल्याण

अंबाला रोड पर एक होटल में मीडिया से रूबरू कल्याण सिंह ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की दो गलतियां हैं। पहली भाजपा में वापस जाना, दूसरा सपा से हाथ मिलाना। उन्होंने कहा कि लिब्राहन आयोग में उनका बयान दर्ज भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं तो उसे ढांचा कहता हूं। उसके गिरने के लिए न तो माफी मांगूंगा, न मुझे पश्चाताप है और न ही खेद। उनसे जब पूछा गया कि 2009 में तो उन्होंने खेद प्रकट किया था, तो बोले, मेरा बयान तोड़ मरोड़कर पेश किया गया।
उन्होंने दिग्विजय सिंह के मुस्लिमों को छह से आठ फीसदी आरक्षण देने के बयान की भी निंदा की। मुलायम सिंह द्वारा मुस्लिमों को 18 फीसदी आरक्षण देने की पैरवी करने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। बोले, संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। दूसरा, मुस्लिम आरक्षण का मतलब पिछड़ी जातियों के गले पर छुरी चलना है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में सपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस सब एक जैसे हैं।
इसीलिए साजिश के तहत लोकपाल कानून नहीं बनने दिया गया। उन्होंने कहा कि सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। किसे समर्थन देना है, इसका फैसला चुनाव बाद करेंगे। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि वे केंद्र के भ्रष्टाचार और महंगाई की बात क्यों नहीं कर रहे। यहां बता दें 2009 में तब मुलायम सिंह और कल्याण सिंह ने हाथ मिलाए थे।
इस पर मुस्लिमों की गहरी नाराजगी देखते हुए मुलायम ने दारुल उलूम आने का फैसला लिया। इससे पहले अमर सिंह को भेजा। अमर सिंह से तालिब-ए-इल्म ने सवाल किया कि क्या कल्याण सिंह ने छह दिसंबर 1992 की घटना के लिए माफी मांग ली? इसके बाद कल्याण सिंह ने घटना पर खेद व्यक्त किया था। इसके थोड़े दिन बाद मुलायम सिंह दारुल उलूम आए थे।












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