हरियाणा: मैदान रहित स्कूलों की होगी मान्यता रद्द

जींद। घरों में स्कूल चलाने वालों के लिए बुरी खबर है,क्योंकि शिक्षा मंत्री ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में सर्वे करें कि आठवीं कक्षा तक स्कूल चलाने वाले संचालकों के पास बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त मैदान है या नहीं। सरकार ने अब यह ठान लिया है कि जिन स्कूलों के पास बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त मैदान नहीं है उनकी मान्यता रद्द की जाए।

यही नहीं सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में दो पीरियड़ खेल व शारीरिक शिक्षा के लिए अतिरिक्त लगाए जाना अनिवार्य कर दिए हैं। सरकार खेल के प्रति कितनी गंभीर है इसका प्रमाण यह है कि अब जिन स्कूलों के पास खेल का मैदान नहीं है वे अपने बोरी-बिस्तर समेटने के लिए तैयार रहें। सरकार के आदेश आते ही जिले में चल रहे ऐसे सैंकड़ों स्कूल संचालकों के होश उड़ गए हैं। कई संचालकों ने तो अपने घरों में ही स्कूल खोल रखे हैं। ऐसे में खेल का मैदान उनकी सोच से परे की बात है। बहुत से संचालकों ने रिकार्ड में स्कूल कहीं दिखा रखा है तो खेल का मैदान कहीं और। प्रदेश सरकार खिलाडिय़ों को तैयार करने के मामले में किसी तरह की कोताही करने वालों को बखसने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने जहां खेल व शिक्षा मंत्रालयों से मिल-जुलकर कार्य करने को कहा है।

वहीं शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने भी अब तीखे तेवर अपना लिए हैं। निजी स्कूलों को साफ तौर पर निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे आठवीं कक्षा तक के स्कूलों में भी खेल का मैदान सुनिश्चित करें। साथ ही खेल व शारीरिक शिक्षा के अलग-अलग पीरियड लगाएं। ऐसा नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इतना ही नहीं सरकार के निर्देश हैं कि स्कूलों में इस कोताही के जिम्मेदार स्कूल प्रभारी व जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों से सर्वे कर रिपोर्ट मांगी है कि किन-किन स्कूलों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग ने भी सभी जिलों के खेल अधिकारियों से रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। शिक्षा के अधिकार की तरह राज्य में खेल के अधिकार के कानून की दिशा में सरकार सख्त कदम उठा रही है। माना जा रहा है कि यह सब मुख्यमंत्री हुड्डा का यह राइट टू प्ले की दिशा में अगला कदम है। हाल ही में सम्पन्न हुए। स्पैट टैस्ट में जिस तरह से बच्चों ने रूचि दिखाई है उससे साफ जाहिर होता है कि समूचा हरियाणा प्रदेश खेल नर्सरी बनता जा रहा है। अब शिक्षा विभाग के नए निर्देश भी मिल का पत्थर साबित होगा।

इस बारे में शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि खेल के मामले में पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूलों में खेल का मैदान नहीं होने की दिशा में स्कूलों की मान्यता रद्द होगी। इस दिशा में नियम बनाकर दे दिए गए हैं। अब स्कूलों में दो पीरियड भी लगाने होंगे। पूरे सर्वे के बाद नए सत्र से स्कूलों का माहौल अलग ही होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर खेल की दिशा में शिक्षा विभाग पूरी तरह से जुटा हुआ है। जब इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में शिक्षा विभाग नहीं बल्कि खेल विभाग सर्वे रिपोर्ट तैयार करेगा। शिक्षा विभाग के पास ऐसी कोई पावर नहीं रह गई है। सरकार ने यह पावर पहले ही खेल विभाग को दे दी है।

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