हादसों भरा रहा साल 2011

देश के किसी भाग को नहीं बख्शा हादसों और प्राकृतिक आपदाओं ने हादसों की शुरूआत 14 जनवरी को केरल के इदुक्की जिले से हुई जहां सबरीमाला अयप्पा मंदिर से लौट रहे 100 से अधिक श्रद्धालु वहां भगदड़ मचने से मौत के मुंह में चले गए और कई घायल हो गए। 20 जनवरी को केरल उच्च न्यायालय ने पूछा कि क्या मकर ज्योति मानव निर्मित है।
सबरीमाला मंदिर में हुए हादसे के बाद इस ज्योति की प्रामाणिकता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बरस के आखिरी माह में पश्चिम बंगाल की दो घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया। यहां नौ दिसंबर को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भूतल में रखी ज्वलनशील सामग्री में आग लगने और उसके फैलने से 90 से अधिक लोगों की मौत हो गई। मरने वाले ज्यादातर मरीज थे।
इसी माह के दूसरे पखवाड़े में राज्य के केनिंग जिले में जहरीली शराब पीने से 170 लोगों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक फरवरी को भारत तिब्बत सीमा पुलिस के भर्ती कैंप से लौटते समय दो टेनों की छतों पर बैठे 15 युवकों की नीचे गिरने से मौत हो गई। घटना के विरोध में युवकों ने ट्रेन जला दी और हिंसा भड़क उठी।
सरकार ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। आईटीबीपी ने माना कि उसे अनुमान नहीं था कि इतनी अधिक संख्या में अभ्यार्थी आएंगे। जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले में 14 मार्च को एक मिनी बस खाई में गिरी जिससे 12 लोग मरे और 68 घायल हुए।












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