चुनावों के कार्यक्रम से आम बजट में हो सकती है देरी

Assembly polls
दिल्‍ली। पांच राज्यों में 30 जनवरी से तीन मार्च के बीच विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद संसद में बजट पेश करने की तारीखों में बदलाव होने की संभावना है। आम बजट हर साल फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता है जिसे आगामी वर्ष में चार मार्च तक टाला जा सकता है जिस दिन उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में मतगणना होगी। बजट की तारीखें टलने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि आयोग ने तारीखों को तय करने से पहले कई चीजों पर विचार किया है।

उन्होंने कहा, लेकिन एक उदाहरण है, मुझे लगता है कि 1976-77 में बजट पेश करने में देरी हुई थी। हालांकि पूर्व चुनाव आयुक्त जीवीजी कृष्णमूर्ति का मानना है कि पांच राज्यों के लिए चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के मद्देनजर सरकार को बजट पेश करने की तारीखें टालने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता चुनाव वाले राज्यों पर लागू होती है ना कि केंद्र पर।

कृष्णमूर्ति ने कहा, प्रत्येक सामान्य राष्‍ट्रीय कामकाज होना चाहिए। केंद्रीय बजट एक राष्टीय कार्य है और चुनाव इसे पेश किये जाने में बाधा नहीं बन सकते। बजट पेश करना राष्‍ट्रीय कार्य है ना कि राजनीतिक दलों का कामकाज। विश्लेषक 1990 के दशक में बजट पेश होने में देरी के एक मामले को याद करते हुए कहते हैं कि सरकार ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त टी एन शेषन की सलाह पर ऐसा किया था। लेकिन तब से राज्यों में चुनावों के चलते बजट को टाला नहीं गया।

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