सोशल नेटवर्किंग साइटों से दूर रहें सैनिक

इंटरनेट पर ये जासूस या एजेंट अपने को महिलाओं के रूप में पेश करते हैं। सूत्रो के मुताबिक इसके मद्देनजर कई बैठकें हुईं ताकि दुश्मन का जासूस सोशल नेटवर्किंग साइटों के माध्यम से अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने के लिए सरकारी कंप्यूटरों का उपयोग न कर सके। अधिकारियों को भी इन तरकीबों के बारे में बताया गया है।
हालांकि कोई भी इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने या आंकड़ा देने को इच्छुक नहीं कि कितने अद्र्धसैन्यकर्मी इस प्रकार के साइबर जासूसी मामलों में शामिल हैं लेकिन इन घटनाक्रम को करीब से जानने वाले दूर संचार मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में तैनात अधिकारियों पर नजर रखने के लिए एक प्रभावी तंत्र तैयार किया जा रहा है।












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