यूपी विस चुनाव में होगी दिग्विजय-उमा की अग्निपरीक्षा

यह नेता हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र सिंह तोमर जो पूर्व में मध्यप्रदेश में भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके है और अब वे मुरैना से सांसद भी है। हालांकि दिग्विजय सिंह ने पिछले चुनावों में उमा भारती का पलड़ा भारी रहने संबंधी सवाल पूछे जाने पर कहा कि राजनीति अनिश्चितताओं से घिरी है और जरूरी नहीं कि वक्त अपने आप को दोहराए। सिंह और भारती का सामना मध्यप्रदेश में हुए 2003 के विधान सभा चुनाव के कुछ पहले हुआ था। उस वक्त भारती भाजपा की प्रमुख प्रचारक थीं और सिंह मुख्यमंत्री के रूप में 10 साल पूरे करने जा रहे थे।
2003 के चुनावों में भाजपा ने भारी जीत हासिल की और उसे दो तिहाई से अधिक सीटें मिली। चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय हुई और उस को कुल मिला कर 40 सीटें भी प्राप्त नहीं हुई। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति पिछले दो दशकों में भाजपा, सपा और बसपा के चारों ओर घूमती रही है । प्रदेश की राजनीति में 1990 के दशक की शुरूआत में भाजपा करिश्माई रूप से उभरी लेकिन उसका पतन भी राज्य में उतनी ही तेजी से हुआ। उधर पिछले विधानसभा चुनाव में 406 सदस्यीय सदन के लिए हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन भी काफी खराब रहा था।
बसपा के जहां 206 सीटें मिली थीं तो वहीं सपा को मात्रा 97 सीटों से संतोष करना पड़ा था। भाजपा को 51 तथा कांग्रेस को मात्रा 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और 1990 के दशक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह आज पार्टी में शामिल तक नहीं हैं। इसके अलावा भाजपा के कलराज मिश्र, लालजी टंडन, मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेता आज या तो पार्टी में किनारे लगा दिए गए हैं या फिर केन्द्र में भूमिका अदा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के इन दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का आमना-सामना बाद में बिहार के एक विधानसभा चुनाव में भी हुआ था।
इस चुनाव में भी भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा सीटें मिली थी जिसके कारण भारती ने यह कहा था कि जब भी उन्हें मौका मिला है उन्होंने सिंह को शिकस्त ही दी है। लेकिन मध्यप्रदेश में हुए 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद दोनों ने राजनीतिक जीवन में अलग अलग रास्ते अपनाए हैं। सिंह जहां हमेशा से ही कांग्रेस के साथ रहे हैं वहीं भारती का संबंध भाजपा से कभी अच्छा कभी खराब रहा है। भारती को दो बार भाजपा से निकाला भी गया लेकिन इस साल वे फिर से पार्टी में वापस लौट आई है।
दूसरी बार निकाले जाने के बाद उमा भारती ने अपनी खुद की भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाई थी जिसने 2008 के विधान सभाचुनाव में पांच सीटें हासिल की थी। उन के भाजपा में वापस चले जाने के बाद उनकी पार्टी का भाजपा में विधानसभा और उसके बाहर विलय हो गया है। भारती द्वारा उत्तरप्रदेश में प्रचार करने से सिंह जरा भी विचलित नहीं है क्योंकि उनका कहना है कि राजनीति में यह जरुरी नही है जो पहले हुआ है वहीं फिर से हो।












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