दिल्ली मेट्रो लाएगी आधुनिक सिग्नल प्रणाली

प्रौद्योगिकी को संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण (सीबीटीसी) के नाम से जाना जाता है और इससे दिल्ली मेट्रो की ट्रेन ढाई के बजाए डेढ़ मिनट के अंतराल पर चलाई जा सकती है। इस प्रणाली से तीसरे चरण के लाइनों पर यात्रियों के इंतजार का समय कम हो जाएगा। 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त होने वाले श्रीधरन ने कहा कि हम हर 90 सेकेंड में ट्रेन चला सकते हैं जो वर्तमान सिगनल प्रणाली में संभव नहीं है।
सीबीटीसी में हम 90 सेकेंड में चला सकते हैं जो दस कोच वाले ट्रेन के बराबर है। उन्होंने कहा कि पहली बार इस प्रणाली को भारत लाया जा रहा है। दिल्ली मेट्रो के तीसरे चरण में राजधानी का 103 किलोमीटर हिस्सा जुड़ेगा। यह पूछने पर कि क्या सीबीटीसी को वर्तमान के प्रथम एवं दूसरे चरण में लागू किया जा सकता है तो श्रीधरन ने कहा कि यह भी संभव है क्योंकि सिगनल प्रणाली का समय 15 से 20 वर्षो का होता है।
जब उन्हें हटाया जाने लगेगा तो वहां सीबीटीसी का प्रयोग किया जा सकता है। श्रीधरन ने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने वर्तमान के चार एवं छह कोच वाली मेट्रो को आठ कोच वाली ट्रेन में बदलने के लिये मित्सुबिशी-रोटेम, मित्सुबिशी इलेक्टिकल और जर्मनी के ट्रेन निर्माता बम्बार्डियर को 212 कोच के निर्माण का आर्डर दिया है।
उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ वाले मार्ग पर हम ज्यादा ट्रेन चाहते हैं। भीड़भाड़ वाले मार्गो पर टेन की लंबाई बढ़ाने के लिये हमने आठ कोच वाले टेनों का आर्डर दिया हुआ है। वे अगले वर्ष सितम्बर से आने लगेंगी और अगले वर्ष के अंत तक लाइन दो (गुड़गांव) और लाइन तीन (नोएडा-वैशाली) पर आठ कोच वाली ट्रेनें चलने लगेंगी।












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